काल सर्प दोष कारण और निवारण

वाराहमिहिर ने इसका सर्प योग के नाम से उल्लेख किया है, सारावली में भी सर्पयोग का ही वर्णन मिलता है। आधुनिक ज्योतिष का मानता है कि सूर्य, चंद्र और गुरु के साथ राहू के होने को कालसर्प दोष बनता है। राहू का अधिदेवता काल है तथा केतु का अधिदेवता सर्प है। इन दोनों ग्रहों के बीच कुंडली में एक तरफ सभी ग्रह हों तो कालसर्प दोष कहते हैं। राहू-केतु हमेशा वक्री चलते हैं तथा सूर्य चंद्रमार्गी। कालसर्प दोष होता है या नहीं यह सवाल सबसे महत्वपूर्ण है। कालसर्प दोष जातक के पूर्व जन्म के किसी जघन्य अपराध के दंड या शाप के कारण उसकी जन्मकुंडली में बैठ जाता है। जिससे वह व्यक्ति आर्थिक व शारीरिक रूप से परेशान रहता है। यहां तक की उसे संतान संबंधी विभिन्न प्रकार के कष्ट भी सामने आ जाते है। या तो उसके घर में संतान पैदा ही नहीं होती। यदि जीवन में संघर्ष बहुत ज्यादा हो, बार-बार बनते-बनते काम रह जाते हों या ज्योतिष की भाषा में कहें तो सारे ग्रह राहु-केतु के बीच हों तो कालसर्प दोष होता है.बाल्यकाल घटना-दुर्घटना, चोट लगना, बीमारी आदि, विद्या में रुकावट, विवाह में विलंब, वैवाहिक जीवन में तनाव, तलाक, संतान का न होना, धोखा खाना, लंबी बीमारी, आए दिन घटना-दुर्घटनाएं, रोजगार में दिक्कत, घर की महिलाओं पर संकट, गृहकलह, मांगलिक कार्यों में बाधा, गर्भपात, अकाल मृत्यु, प्रेतबाधा, दिमाग में चिड़चिड़ापन आदि। जन्म के समय ग्रहों की दशा में जब राहु-केतु आमने-सामने होते हैं और सारे ग्रह एक तरफ रहते हैं, तो उस काल को सर्प योग कहा जाता है। जब कुंडली के भावों में सारे ग्रह दाहिनी ओर इकट्ठा हों तो यह कालसर्प योग नुकसानदायक नहीं होता। जब सारे ग्रह बाईं ओर इकट्ठा रहें तो वह नुकसानदायक होता है। इस आधार पर उन्होंने काल सर्प के 12 प्रकार भी बता दिए हैं।
ज्योतिषियों ने काल सर्प दोष के 12 मुख्य प्रकार बताएं हैं 1. अनंत, 
2. कुलिक, 
3. वासुकि, 
4. शंखपाल, 
5. पद्म, 
6. महापद्म, 
7. तक्षक, 
8. कर्कोटक, 
9. शंखनाद, 
10. घातक, 
11. विषाक्त 
12. शेषनाग।..
कालसर्प दोष की शांति हेतु उज्जैन और त्रयंबकेश्वर में अनुष्ठान और पूजा पाठ किया जाता है। सबसे उत्तम उपाय है त्रयंबकेश्वर में जाकर शांतिकर्म करवाना। इसके अलावा राहू तथा केतु के मंत्रों का जाप करें या करवाएं। उज्जैन में नाग सर्प बली अनुष्ठान करवाएं। सर्प मंत्र या नाग गायत्री के जाप करें या करवाएं। भैरव उपासना करें या श्री महामत्युंजय मंत्र का जाप करने से राहू-केतु का असर खत्म होता है। नागपंचमी को सपेरे से नाग लेकर जंगल में छुड़वाएं। पितृ शांति का उपाय करें। इस तरह के अनेक उपाय बताए जाते हैं।
- प्रतिदिन शिवजी का जल से अभिषेक करें और बेलपत्र चढ़ाएं
- शिवलिंग पर चांदी का नाग अर्पित करें
- शिवरात्रि पर शिवजी का महाअभिषेक करवाएं
- घर में मोरपंख रखें
- शेषनाग पर लेटे हुए विष्णु जी का चित्र अपने घर पर ऐसे लगाएं की घर में घुसते समय दर्शन हो
- लाल चंदन, सुपारी, मूंगा, कमलगट्टा पर कलावा लपेट कर पूजा स्थान पर रखें और पूजन करें
- सुबह और शाम को हनुमान चालीसा का पाठ करें
- शाम के समय शिवालय में शिवजी के सामने घी का दीपक जलाएं
- धार्मिक स्थान या जरुरतमंद को जल और अन्न का दान करें
यदि काल सर्प दोष का प्रभाव हो तो क्या ना करें
- पैर फैला कर भोजन ना करें
- थाली में झूठन ना छोड़ें
- भोजन के बाद पेट पर हाथ ना फेरें
- अपने कर्म से किसी का दिल ना दुखाएं।