सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

राष्ट्रीय एकता एवं अखंडता और शिवजी को समर्पित रहा सावन उत्सव

प्रयागराज। राष्ट्रीय महिला रचनाकार मंच के तत्वावधान में सावन के उपलक्ष्य में कवयित्री रचना सक्सेना प्रयागराज के संयोजन में आनलाइन “सावन उत्सव” का एक शानदार आयोजन लोकगीत पर आधारित कवयित्री सम्मेलन के रूप में किया गया जो दिनांक 6 जुलाई. से प्रारम्भ होकर 11 जुलाई,, 2020 तक चला। इसकी अध्यक्षता  महिला अधिवक्ता वेल्फेयर, कवयित्री एवं वरिष्ठ रंगकर्मी-रंग निर्देशक ऋतन्धरा मिश्रा ने की एवं मुख्य अतिथि मधु शुक्ला सचिव व्यंजना आर्ट एंड कल्चर सोसाइटी एवं शिक्षिका प्रयाग संगीत समिति रही। इसका संचालन प्रयागराज की चर्चित शायरा डा. नीलिमा मिश्रा ने किया जो अत्यन्त सराहनीय रहा। उनकी आशुकविताओं से समां बाँध दिया। इस आयोजन का प्रारम्भ संयोजिका रचना सक्सेना की वाणी वंदना से हुआ, तत्पश्चात इस आयोजन में पांचों दिन अलग अलग अन्य कवयित्रियों ने अपनी वाणी वंदना से शुभारंभ करते हुऐ महफिल को लोकगीतों और कजरी से सजा दिया। जिसमे रुचि मटरेजा, रेनू मिश्रा, नीना मोहन, एवं डा० अर्चना पाण्डेय की वाणी वंदना शामिल रहीं। लेकिन पाँचों दिनों तक संचालन डा० नीलिमा मिेश्रा ने बाखूबी किया। कार्यक्रम का समापन डा. अर्चना पाण्डेय के आभार ज्ञापन से हुआ। इसकी विशेषता ये रही कि भारत वर्ष के विभिन्न प्रांतों की महिलाओं ने एकत्रित होकर सावन पर आधारित लोकगीतों एवं कजरी की स्वरचित सुंदर प्रस्तुतियाँ आडियो एवं वीडियो के माध्यम  से दीं। इस आयोजन की विशेषता यह रही कि इस कवयित्रियो ने अपनी क्षेत्रीय भाषाओं में लोकगीत प्रस्तुत किये जो सराहनीय रहे भारत की एकता और अखंडता को समर्पित ये सावन महोत्सव का आयोजन अपनी सफलता के लिये सही मापदण्ड पर खरा उतरा। इस कवयित्री सम्मेलन मे सुधा शर्मा, रचना सक्सेना नवनीता दुबे, उर्वशी उपाध्याय, जया मोहन श्रीवास्तव, कविता उपाध्याय, मीरा सिंहा, गीता सिंह, डाॅ. रेखा सक्सेना, डॉ लीला दीवान, संतोष मिश्रा, डा.अर्चना पाण्डेय, चेतना सिंह, आशा जाकड़, डा. नीलिमा मिश्रा, प्रेमाराय, ऊषा सक्सेना, रेनू मिश्रा, सरिता श्रीवास्तव, नीना मोहन, उर्मिला ग्रोवर लखनऊ, नंदिता मनीष सोनी नागपुर, अर्चना जैन मण्डला, सम्पदा मिश्रा, अनामिका अमिताभ गौरव दीपा परिहार ‘दीप्ति’ जोधपुर, डा. सलमा जमाल जबलपुर, रुचि मटरेजा बहराइच, डा. नंदिनी जोशी, अन्नपूर्णा मालवीय, सरोज सिंह राजपूत ठाकुर छत्तीसगढ़, डा. शारदा मिश्रा इन्दौर, मीना जैन भोपाल, सीमा गर्ग मंजरी, मेरठ, नीरजा मेहता गाजियाबाद, डॉ० उपासना पाण्डेय, अर्विना गहलोत, अर्चना कटारे शहडोल (म,प्र,), मीना विवेक जैन वारासिवनी, वर्षा अग्रवाल अलीगढ, हेमलता गोलछा, महक जौनपुरी, मधु वैष्णव मान्जोधपुर राजस्थान, सुशीला जोशी ‘विद्योत्तमा’ मुजफ्फरनगर, गायत्री भटेले देवासम, डाॅ. नीलम रावत लखनऊ उ.प्र., रानी सोनीष्परी, ममता कानुनगो इंदौर म.प्र., इन्दू श्रीवास्तव आजमगढ़, आभा मिश्रा शोभा सहाय, कुसुम खरे, रश्मि लता मिश्रा सी जी, इंदु सिन्हा बगलौर, बीना शर्मा, योगिनी काजोल, रागिनी तिवारी स्नेह, किरन मोर, पुष्पलता लक्ष्मी, इंदू जैन इंदू मंडला मध्यप्रदेश, मंजु निगम, सविता कुमारी श्रीवास्तव, इंदू बाला, उमा सहाय, अंकिता यादव, आदि ने अपनी प्रस्तुति दी।


इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

पक्षी आपका भाग्य बदले

मनुष्य का जीवन अपने आसपास के वातावरण से ही प्रभावित होता है। व्यक्ति के आस-पास के पशु पक्षी उसके जीवन का अभिन्न अंग है। भारतीय ऋर्षियों तथा संसार के अध्यात्मवादियो ने संसार के पक्षियों को ना केवल ज्योतिष तथा मनुष्य के भाग्य से जोड़ा है। बल्कि पक्षियों को उपयोग शकुन ज्योतिष, फलित तथा प्रष्न ज्योतिष तथा अनेकों ज्योतिष, तांत्रिक उपचारों और शारीरिक मानसिक रोगों के निवारण में किया है। भारत मे पंच प़क्षी शास्त्र, कल्ली पुराण पर आधारित तोते द्वारा भविष्यवाणी, पक्षी तंत्र तथा शकुन ज्योतिष का प्रयोग आदिकाल से ही किया जाता है भारत मे गरूड़ जी, नीलकंठ, काकभुषुंडी,, हंस, जटायु व संपाती, शुकदेव जी आदि दिव्य पक्षियों तथा अनेक देवी देवताआंे वाहन के रूप मे पक्षियों को प्रयोग किये जाने का  वर्णन है। जैसे भगवान विष्णु का गरूड़, कार्तकेय जी का मयूर, माता लक्षमी का उल्लू, विश्वकर्मा, वरूण जी तथा स्वरसती जी का हंस आदि शनिदेव का कौआ आदि का प्राचीन काल मे पक्षियों द्वारा डाक सेवा युद्ध संबधी शकुन का भी काम लिया जाता था पक्षियों को स्वतंत्रता, नवीन विचारों, आनंद, तनाव, मुक्ति, प्रषंसा, यष, धन्यवाद देने, प्रजनन श

परिवर्तन योग से करें भविष्यवाणी

भारतीय ज्योतिशशास्त्र में भविष्यकथन के सैकड़ों सूत्रो का वर्णन है। इन्ही सूत्रों मे से एक है परिवर्तन योग जिसका वर्णन पाराशरीय और नाड़ी ग्रन्थों दोंनों मे पाया जाता है। हाँलाकि दोनो प्रकार के ग्रन्थों में इन सूत्रों को विभिन्न तरीको से प्रयोग किया गया है ज्योतिष मे परिवर्तन योग के तीन रूप पाये जाते हैं। 1. भाव परिवर्तन 2. राशि परिवर्तन 3. नक्षत्र परिवर्तन  भाव परिवर्तन पाराशरीय व कुछ नाड़ी ग्रन्थों जैसे षुक्र नाड़ी मे इसके सूत्रो का वर्णन पाया जाता है। जो भावा के स्वामियो के बीच स्थान परिवर्तन से बनता है। जैसे चतुर्थेश षष्ठ भाव मे जाय और षष्ठेश चतुर्थ भाव मे जाय। इसके भी तीन भेद हैं। 1. दो शुभ भावों के स्वामियों का परस्पर परिवर्तन जैसे लग्न व पंचम भाव का परिवर्तन या दो केन्द्रेशों का परिवर्तन या केन्द्र और त्रिकोण भाव मे परस्पर परिवर्तन। 2. दो त्रिकेशांे का परिवर्तन जो विपरीत राजयोग बनाता है। 3. किसी केन्द्रेश या त्रिकोणेश का त्रिकेश से परिवर्तन। जैसे दशमेश का द्वादेश से परिवर्तन या पंचमेश या द्वादेश के बीच परिवर्तन। 2. ग्रह या राशि परिवर्तन  इसका वर्णन स्व. आर. जी. राव द्वारा अनुवादित और

जेल जाने के योग

ज्योतिष शास्त्र अनुसार कुंडली के आठवें मतांतर से बारहवें भाव से कारावास तथा सजा का विचार किया जाता है। कुंडली के इस घर में राहु अगर अष्टमेश के साथ हो तो उसके अशुभ प्रभाव के कारण व्यक्ति को किसी बड़े अपराध के कारण जेल जाना पड़ता है। शनि  मंगल और राहू मुख्य रूप से यह तीन ग्रह एवम् इनका आपसी सम्बन्ध जेल के कारक है। शनि व 12 भाव सजा का कारक है। छठा भाव व मंगल राहू अपराध के कारक है। अगर किसी व्यक्ति की कुण्डली में मंगल और राहु एक साथ किसी भाव में बैठकर युति करते हैं तो जेल योग बनता है केतु रस्सी बेड़ी हथकड़ी का कारक ग्रह हैं अशुभ मंगल व राहु के बीच दृष्टि संबंध बनता हो तो अंगारक योग की वजह से ऐसा इंसान हिंसक स्वभाव वाला हो जाता है और अपराध करता है जिससे जेल जाना पड जाता है। शनि मंगल व राहु मुख्य रूप से जेल यात्रा कराने का भी योग बनाते हैं और इनकी युति या आपस में दृष्टि इस तरह की स्थितियां बना देती है कि आखिर इंसान को जेल जाना ही पड जाता है। जन्मकुंडली में सूर्यादि ग्रह समान संख्या में लग्न एवं द्वादश तृतीय एवं एकादश, चतुर्थ, दशम, षष्ठ एवं अष्टम भाव में स्थित हो तो यह बंधन योग बनाता है यह स्थिति