रचना सक्सेना एक बहुमुखी प्रतिभा सम्पन्न, स्त्री संवेदना से आपूरित कवयित्री: डा. सरोज सिंह

महिला काव्य मंच प्रयागराज ईकाई के तत्वावधान में महिला काव्य मंच की महासचिव ऋतन्धरा मिश्रा के संयोजन में महिला काव्य मंच प्रयागराज ईकाई की अध्यक्ष रचना सक्सेना पर केन्द्रित एक समीक्षात्मक परिचर्चा का आयोजन किया गया। इस परिचर्चा में नगर की अनेक वरिष्ठ महिला साहित्यकारों ने भाग लिया। रचना सक्सेना की कविताओं और कहानी की समींक्षा करते हुए डा० सरोज सिंह ने अपने विचार व्यक्त किये कि रचना सक्सेना एक बहुमुखी प्रतिभा सम्पन्न, कर्मठी, जागरूक, नारी गौरव से विभूषित, स्त्री संवेदना से आपूरित ,संगठन एवं नेतृत्व की क्षमता से पूर्ण ,समसामयिक संदर्भों के प्रति सजग रचनाकार हैं। उनका व्यक्तित्व किसी परिचय का मोहताज नही है उनकी कविता विरहिणी रामकथा के उपेक्षित पात्र उर्मिला के संवेदनशील पक्ष को रेखांकित करती हुई अपनी सजग नारी दृष्टि का परिचय देती हैं। उर्मिला के समर्पण, त्याग ,पति प्रेम को मार्मिक ढंग से विश्लेषित करती है। उनकी समस्त रचनाओं की भाषा सरल और संप्रेषणीय हैं ।
डा० नीलिमा मिश्रा के अनुसार रचना सक्सेना साहित्य जगत का एक ऐसा नाम है जो रचनाओं के साथ संवाद करती हैं। भारतीय नारी के पूरे अस्तित्व को अपने ह्रदयस्पर्शी शब्दों का पहनावा प्रदान करती हैं, चाहें वह पौराणिक उर्मिला हो या आज की आधुनिक रंग में रंगी नारी का चित्रण, सभी रचनाएँ बरबस ही आपका मन मोह लेती हैं।
आग से लड़ने की हिम्मत हो गयी” ये कह कर रचना जी मैथिलीशरण गुप्त की अबला नारी को चुनौती देती प्रतीत होती हैं। डा. अर्चना पाण्डेय कहती हैं कि रचना जी का स्वभाव एवं उनका व्यक्तित्व उनके कृतित्व का प्रतिबिंब है। रचना जी की रचनाएं यथा नाम तथा गुण को चरितार्थ करते हुए अत्यंत सरल, सुबोध एवं बोधगम्य प्रतीत होती हैं। ऋतन्धरा मिश्रा कहती हैं कि रचना की रचनाएं प्राकृतिक रमणीय दृश्यों से ओत प्रोत होने के साथ ही पारंपरिक संस्कार प्रेम, श्रृंगार, रिश्तो के एहसास, समाज की पीड़ा, नारी पीड़ा नारी सशक्तिकरण को भी  व्यक्त करती हैं। महक जौनपुरी के अनुसार आपकी रचनायें संदेशपरक और प्रेरणादायक होती है। यह सब इसीलिए संभव है क्योंकि आपकी सोच बहुत साफ-सुथरी है।कविता उपाध्याय कहती हैं कि रचना के लिए कविता, कहानी, लघु कथाएँ लिखना उन की धुन में समाहित है। वह हर पल में से पल चुरा कर सुजन करती रहती हैं। सविता श्रीवास्तव कहती हैं कि रचना अपने अप्रतिम लेखन के माध्यम से गद्य एवं पद्य दोनों ही विधाओं से साहित्य जगत को प्रतिष्ठित कर रही हैं। सुमन दुग्गल का कहना है कि रचना सक्सेना अपने चिंतन और विचारों को सहज और सरल तरीके से कविताओं और गजल में व्यक्त करती हैं। देवयानी का कहना है कि सौम्य शांत सुगृहणी सी रचना जी का क्षेत्र आज सीमित नहीं है आज वो प्रयाग राज की प्रतिष्ठित कवयित्री है जो साहित्य के क्षेत्र मे बहुत काम कर रही है। वरिष्ठ कवयित्री उमा सहाय कहती हैं कि रचना सक्सेना हिंदी साहित्य जगत को पूर्णतरू समर्पित एक भाव प्रवीण, संवेदनशील एवं कर्मठ महिला साहित्यकार हैं। अनेक सम्मानों एवं मानद उपाधियों से उनका साहित्यिक व्यक्तित्व अलंकृत है। डा० पूर्णिमा मालवीय केअनुसार इनका काव्य तथा लघु कथाएँ प्रासंगिक, शिक्षाप्रद तथा पाठकों को अंत तक बांधने में सक्षम है। जया मोहन जी कहती हैं कि रचना ने अपनी रचनाओं में मानवीय संवेगों के हर पहलू को उन्होंने छुआ है। वे काव्य मंच के रथ को कुशल सारथी की तरह साहित्य जगत में आगे बढ़ा रही है जो उनकी कर्मठता का द्योतक है। मीरा सिन्हा कहती हैं कि रचना सक्सेना प्रयाग राज की ऐसी शक्सियत हैं जिसने बहुत कम समय में ही साहित्य जगत को अपनी मेहनत से बहुत कुछ दिया और उन लोगों के लिए प्रेरणा बनकर उभरी जो गृहस्थी में अपनी अन्दर की प्रतिभा को दब जाने देते है इन्होने यह सिध्द कर दिया कि यदि प्रतिभा के बीज दबे हुए है तो जरा सा ही हवा पानी पाते ही पौधा और फिर वृक्ष का रुप धारण कर लेते हैं। प्रेमा राय का कथन है कि रचना बहुत संवेदनशील कवियित्री हैं जिसमें  नैसर्गिक नार्योचित गुण प्रेम, ममता, करुणा, सहिष्णुता, त्याग ,समायोजन आदि सहज रूप से पुंजी भूत हैं जो उनकी रचनाओं मे परिलक्षित होते हैं। उनकी लगभग समस्त रचनायें जैसे-विरहिणी ,पतिविहीना, रूई की गद्दी बना दे,बक्सा आदि करुणरस प्रधान हैं। यह परिचर्चा  महिला काव्य मंच पूर्वी उत्तर प्रदेश की अध्यक्षा मंजू पाण्डेय की अध्यक्षता में सफलतापूर्वक सम्पन्न हुई।