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फिर से मुस्कुराएगा मुंबई

तमाम मुश्किलों को झेलते हुए, तमाम समस्याओं का सामना करते हुए भी हमेशा चलते रहने वाला, जिंदादिल व मुस्कुराते रहने वाला एक शहर कोरोना महामारी जब पूरे विश्व में अपना आतंक फैलाते हुए भारत की ओर बढ़ रहा था, तब तक कई हजार लोग उसकी चपेट से संक्रमित हुए तो कई लोगो को अपनी जान से हाथ भी धोना पड़ा। इस महामारी के बारे में जब तक केंद्र सरकार और राज्य सरकार कुछ समझ पाती तब तक यह बीमारी भारत में दस्तक दे चुकी थी तथा इस वायरस की दवा क्या है इस खोज में पूरी दुनिया के वैज्ञानिक संशाधन में जुड ़गए किन्तु इस बीमारी से बचने का बेहतर रास्ता सरकार को नजर नहीं आया तो उसे एक ही रास्ता दिखा वो था लाॅकडाउन। जिससे लोग एक-दूसरे के सपर्क में ना आये और बीमारी की चैन को तोडा जाये इसलिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पहला लाॅकडाउन यानि की  जनता कफ्र्यू लगाया गया किन्तु जब 25 मार्च, 2020 को राष्ट्रीय स्तर पर सम्पूर्ण भारतवर्ष में कोरोना वायरस से लड़ने के लिए (फेस-1ष् यानि की 25 मार्च से 14 अप्रैल तक जिस दिन लाॅकडाउन घोषित किया गया, उस दिन से लगा की मुंबई जैसे बड़े शहर पर ग्रहण लग गया हो। इस शहर की रफ्तार, इसकी जिंदादिली पर कई तरह के असर पड़े।
 पहले लाॅकडाउन से मई महीने के पहले हफ्ते तक पूरे तरह शहर में लाॅकडाउन होने के कारण ज्यादातर काम-काज बंद पड़ गया, स्कूलों पर ताला लग गया, तथा सारे व्यापार पर अंकुश लग गया, मुंबई की लाइफ लाइन, मुंबई की जान जो लोगो अपने निर्धारित समय पर एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाने वाली लोकल ट्रेन एवं बेस्ट की बसों पर रोक लगा दिया। यह सब अपने आपमें मुम्बईकरो लिए तकलीफदेह था। ऐसा लग रहा था, जैसे मनो की 1.84 करोड ़लोगों को घरो में बंद कर दिया गया हो, प्रतिदिन मुंबई में कोरोना वायरस से संक्रमित होने वालो की संख्या बढ़ रही थी वही दूसरी ओर लोग दिन-प्रतिदिन इस्तेमाल में आने वाले सभी वस्तुआंे के खरीदारी के लिए भी लम्बी कतार लगे थे, इसके कारण राशन पर भी ब्लैक मार्केटिंग चालू हो गई, तथा कही राशन का भाव डबल हुआ तो कही स्टाॅक खत्म, सभी के मन एक ही सवाल था अब आगे क्या? 
 कोरोना वायरस के कारण बहुत से लोगो की नौकरी छूट रही थी, एक ओर महाराष्ट्र सरकार, बृहन्मुम्बई म्युनिसिपल कारपोरेशन (ठडब्) के हेल्थ डिपार्टमेंट, वाटर डिपार्टमेंट, मुंबई पुलिस, तथा राशन व जरूरतमंद वस्तुओं के ट्रांसपोर्ट से जुड़े लोग अपने जान की परवाह किये बिना जनता की सेवा में दिन-रात लगे हुए थे। ये वही मुंबई है जिसे ‘नेवरस्टाॅपसिटी’ भी कहा जाता है जहा की लोकल ट्रेन सुबह 4.30 बजे अपनी तेज रफ्तार के साथ दौड़ती है और रात को करीब 1.30 की आखिरी ट्रेन होती है तथा इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ है की आजादी के बाद करीब 80 से ज्यादा दिन लोकल ट्रेन के पहिये जाम रहे। टैक्सी, आॅटो, कार बाइक सब कुछ लगभग बंद हो गया था, मुंबई की रोड अब सूनी पड़ गइ थी, भारत की आर्थिक राजधानी भी कहा जाने वाला शहर काफी हद तक ठहर सा गया था।
 मुंबई के इतिहास में ऐसा पहेली बार हुआ जब कोरोना वायरस के कारण सब कुछ ठप्प पड़ गया। इस महानगरी ने कई समस्याओं का सामना किया है, जैसे की बम ब्लास्ट चाहे वो 1993 में 12 जगहों पर बम ब्लास्ट हुआ था या फिर वो 2013 का बम ब्लास्ट क्यों नहो। यहाँ तक की 26 जुलाई 2005 का बाढ़ जिसने पूरे मुंबई को पानी में डुबो सा दिया था। जिसके कारण मुंबई का सामान्य जीवन पूरी तरह से अस्त-व्यस्त हो गया था, उसके बाद एक और बड़ी घटना घटी जिसका असर मुंबई ही नहीं भारत में ही नहीं तो पूरे विश्व असर दिखा था, और यह घटना 26 नवंबर 2008 को मुंबई पर आतंकी हमला था। जिसमे अजमल कसाब के साथ उसके कई आतंकी साथियो ने मिलकर मुंबई पर कायराना हमला किया था, इस हमले में 160 से ज्यादा लोग मारे गए थे और 300 से ज्यादा लोग घायल हुए थे। इस आतंकी हमले ने मुंबई को बम धमाकों और गोली बारी से दहला दिया था। इस घटना में भारतीय सेना से मेजर संदीप उन्नीकृष्णन सहित कई जवान मुंबई पुलिस से हेमंत करकरे, तुकाराम गोपाल ओम्ब्ले, अशोक काम्टे, विजय सलास्कर इन सभी वीर जवानो ने अपनी जान की आहुति देकर मुंबई को आतंकी हमले से बचाया। लेकिन मुंबई हमेशा की तरह 1993 का बम ब्लास्ट हुआ वो या फिर 26 जुलाई भयंकर बारिश के बाद भी फिर एक बार उठ खड़ी हुई उसके पश्चात भी मुंबई को 26 नवंबर, 2008 की आतंकी घटना सामना करना पड़ा किन्तु कुछ समय बाद मुंबई फिर अपने रफ्तार से चलने लगी।
उसी तरह कोरोना जैसे महामारी पर भी मुंबई विजय पायेगी, तथा उसी क्रम में महाराष्ट्र सरकार ने अर्थव्यवस्था को देखते हुए ष्डपेेपवद ठमहपद ।हंपदष् के तहत कदम उठाया जहाँ पर मुंबई को फिर एक बार 5 जून से शर्तो व नियम के साथ खोला गया। इसी बीच मुंबई की लाइफ लाइन लोकल ट्रेन की शुरूवात आपत्कालीन सेवा कर्मियों के लिए किया गया। मुंबई में दिन पे दिन कोरोना वायरस से संक्रमित लोगो की संख्या बढ़ती जा रही थी, सभी अस्पताल की भी स्थिति गंभीर थी, डाॅक्टर्स और स्वस्थ कर्मी की टीम पी.पी किट पहनकर 24 घंटे मरीजों की सेवा में लगे हुए थे, वही दूसरी ओर एक प्रयास किया जा रहा था की मुंबई की स्थति को अनुकूल किया जाये इसलिए नागरिको से जुडी हर जरूरतो को पूरी करने की कोशिश की गई। अगस्त आते-आते हालत में कुछ सुधार होते नजर आ रहे है, डाॅक्टरों स्वास्थकर्मी, कोरोना वाॅरियर्स जो लगातार इस महामारी  शुरू होने से लेकर अब तक इससे लड़ते रहे है, उनकी कोशिश का ही नतीजा है की एक उम्मीद किरण सी दिखने लगी है अब ऐसा लग रहा है मुंबई फिर से मुस्कुराएगा। नहीं तो एक वक्त जब मुंबई में मजबूर बेसहारा लोग जो छोटे-छोटे नौकरी और रोजगार करने वाले लोग पूरी तरह से परेशान हो गये थे किसी को कुछ नजर नहीं आ रहा था, लोग पैदल ही अपने घरो की तरफ जाने के लिए निकल पड़े थे, सरकारों की कोशिश का भी कुछ खास असर नहीं पड़ रहा था, लेकिन अब हालत सुधरे है। मुंबई एक ऐसा शहर है जहाँ पर हर एक व्यक्ति अपने-अपने सपने को पूरा करने के लिए आता है, और अब आने वाला समय मुंबई के लिए विश्ेष है क्योंकि गणपति उत्सव 22 अगस्त को मुंबई और महाराष्ट्र में शुरू होने जा रहा है, गणपति उत्सव यहाँ बहुत बड़ा उत्सव है, और वही सभी मुंबईकर गणपति जी के आगमन की तैयारी में लगे हुए साथ ही मुंबई को और मुंबई के लोगो को उम्मीद है की गणपति बाप्पा कोरोना वायरस जैसे महामरी संकट से मुंबई ही नहीं भारत ही नहीं बल्कि सम्पूर्ण विश्व को उभरने में मदद करेंगे और फिर से मुंबई मुस्कुराएगा। 


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