सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

शिक्षा का ध्येय संपूर्ण मानव बनाना है

सिटी मोन्टेसरी स्कूल, लखनऊ, द्वारा आज शिक्षक दिवस के पावन अवसर पर बड़े उत्साह व भव्यता के साथ आॅनलाइन ‘शिक्षक दिवस समारोह’ मनाया गया। समारोह में मुख्य अतिथि सुरेश कुमार खन्ना, वित्तमंत्री, उ.प्र., ने अपनी आॅनलाइन उपस्थिति से समारोह की गरिमा को बढ़ाया जबकि समारोह की अध्यक्षता अनिल मिश्रा, रजिस्ट्रार, फम्र्स, सोसाइटीज एवं चिट्स, उ.प्र., ने की। समारोह में सी.एम.एस. के सभी 18 कैम्पस की प्रधानाचार्याओं सहित सी.एम.एस. लगभग 3000 शिक्षकों व कार्यकर्ताओं ने आॅनलाइन जुड़कर समारोह की भव्यता में चार-चांद लगा दिये तथापि सी.एम.एस. संस्थापक व प्रख्यात शिक्षाविद् डा. जगदीश गाँधी व डा. (श्रीमती) भारती गाँधी, सी.एम.एस. प्रेसीडेन्ट प्रो. गीता गाँधी किंगडन एवं सी.एम.एस. के डायरेक्टर आॅफ स्टेट्रजी श्री रोशन गाँधी ने विद्यालय के सभी शिक्षकों के प्रति हार्दिक आभार व धन्यवाद ज्ञापित किया। इससे पहले, सी.एम.एस. के क्वालिटी अश्योरेन्स एवं इनोवेशन डिपार्टमेन्ट की हेड एवं सुपीरियर प्रिन्सिपल सुश्री सुस्मिता बासु ने मुख्य अतिथि समेत अन्य गणमान्य अतिथियों एवं शिक्षकों का हार्दिक स्वागत-अभिनन्दन किया।
 इस अवसर पर अपने संबोधन में मुख्य अतिथि श्री सुरेश कुमार खन्ना, वित्तमंत्री, उ.प्र., ने कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में सी.एम.एस. ने न सिर्फ स्थानीय स्तर पर अपितु वैश्विक स्तर पर सराहनीय कार्य किया है और यह ख्याति सी.एम.एस. ने अपने विचारों व सिद्धान्तों के दम पर हासिल की है, जिसमे सी.एम.एस. के शिक्षकों का अहम योगदान है। कोरोना काल में सी.एम.एस. शिक्षकों ने जिस प्रकार छात्रों की शिक्षा पर कोरोना का प्रभाव नहीं पड़ने दिया, वह अभूतपूर्व है। श्री खन्ना ने आगे कहा कि शिक्षा का ध्येय संपूर्ण मानव बनाना है, जिसमे भौतिक विकास के साथ जीवन मूल्यों व संस्कारों का विकास भी शामिल है। डा. राधाकृष्णन ने भी ऐसी ही शिक्षा पद्धति  के विस्तार पर बल दिया है। समारोह की अध्यक्षता करते हुए श्री अनिल मिश्रा, रजिस्ट्रार, फम्र्स, सोसाइटीज एवं चिट्स, उ.प्र., ने कहा कि सामाजिक विकास में शिक्षकों की भूमिका सदैव प्रासंगिक रहेगी। राष्ट्र निर्माण में जितनी भूमिका शिक्षकों की है, उतनी किसी अन्य की नही है। सी.एम.एस. के शिक्षकों ने अपनी कड़ी मेहनत, लगन व कर्तव्यनिष्ठा से विद्यालय के साथ ही लखनऊ का नाम भी रोशन किया है।
 इससे पहले, शिक्षात्मक-साँस्कृतिक कार्यक्रमों के प्रस्तुतिकरण से ‘शिक्षक दिवस समारोह’ का शुभारम्भ हुआ। स्कूल प्रार्थना, सर्व-धर्म प्रार्थना, विश्व शान्ति प्रार्थना, स्वागत गान, गीत ‘जो तुमने करके दिखलाया’, कव्वाली एवं डा. सर्वपल्ली राधाकृष्णन के विचारों पर आधारित विभिन्न शानदार प्रस्तुतियों ने सभी को भावविभोर कर दिया।
 इस अवसर पर शिक्षकों को सम्बोधित करते हुए सी.एम.एस. संस्थापक व प्रख्यात शिक्षाविद् डा. जगदीश गाँधी ने कहा कि हमारे पास ऐसे शब्द नहीं है जिनसे हम अपने शिक्षकों को धन्यवाद दे सकें। हमारे शिक्षकों ने अनेको ऐसे कीर्तिमान स्थापित किए हैं जो लगभग असंभव लगते थे। आपने 5 बच्चों से शुरू करके इस विद्यालय को गिनीज बुक आॅफ रिकार्ड में स्थान दिलाया है। सी.एम.एस. संस्थापिका-निदेशिका एवं प्रख्यात शिक्षाविद् डा. (श्रीमती) भारती गाँधी ने कहा कि आज हम सब महान शिक्षक, विचारक व पूर्व राष्ट्रपति डा. सर्वपल्ली राधाकृष्णन के जयंती मना रहे हैं। डा. राधाकृष्णन वास्तव में वैश्विक नागरिक थे, उनके विचार सभी देशों व सारी मानवता के लिए प्रासंगिक है और सी.एम.एस. के शिक्षक भी उन्हीं के बताये रास्ते पर चल रहे हैं। शिक्षकों की बदौलत ही सी.एम.एस. को यूनेस्को पीस प्राइज से नवाजा गया है। उन्होंने सभी शिक्षकों को शिक्षक दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं दी।


इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

पक्षी आपका भाग्य बदले

मनुष्य का जीवन अपने आसपास के वातावरण से ही प्रभावित होता है। व्यक्ति के आस-पास के पशु पक्षी उसके जीवन का अभिन्न अंग है। भारतीय ऋर्षियों तथा संसार के अध्यात्मवादियो ने संसार के पक्षियों को ना केवल ज्योतिष तथा मनुष्य के भाग्य से जोड़ा है। बल्कि पक्षियों को उपयोग शकुन ज्योतिष, फलित तथा प्रष्न ज्योतिष तथा अनेकों ज्योतिष, तांत्रिक उपचारों और शारीरिक मानसिक रोगों के निवारण में किया है। भारत मे पंच प़क्षी शास्त्र, कल्ली पुराण पर आधारित तोते द्वारा भविष्यवाणी, पक्षी तंत्र तथा शकुन ज्योतिष का प्रयोग आदिकाल से ही किया जाता है भारत मे गरूड़ जी, नीलकंठ, काकभुषुंडी,, हंस, जटायु व संपाती, शुकदेव जी आदि दिव्य पक्षियों तथा अनेक देवी देवताआंे वाहन के रूप मे पक्षियों को प्रयोग किये जाने का  वर्णन है। जैसे भगवान विष्णु का गरूड़, कार्तकेय जी का मयूर, माता लक्षमी का उल्लू, विश्वकर्मा, वरूण जी तथा स्वरसती जी का हंस आदि शनिदेव का कौआ आदि का प्राचीन काल मे पक्षियों द्वारा डाक सेवा युद्ध संबधी शकुन का भी काम लिया जाता था पक्षियों को स्वतंत्रता, नवीन विचारों, आनंद, तनाव, मुक्ति, प्रषंसा, यष, धन्यवाद देने, प्रजनन श

परिवर्तन योग से करें भविष्यवाणी

भारतीय ज्योतिशशास्त्र में भविष्यकथन के सैकड़ों सूत्रो का वर्णन है। इन्ही सूत्रों मे से एक है परिवर्तन योग जिसका वर्णन पाराशरीय और नाड़ी ग्रन्थों दोंनों मे पाया जाता है। हाँलाकि दोनो प्रकार के ग्रन्थों में इन सूत्रों को विभिन्न तरीको से प्रयोग किया गया है ज्योतिष मे परिवर्तन योग के तीन रूप पाये जाते हैं। 1. भाव परिवर्तन 2. राशि परिवर्तन 3. नक्षत्र परिवर्तन  भाव परिवर्तन पाराशरीय व कुछ नाड़ी ग्रन्थों जैसे षुक्र नाड़ी मे इसके सूत्रो का वर्णन पाया जाता है। जो भावा के स्वामियो के बीच स्थान परिवर्तन से बनता है। जैसे चतुर्थेश षष्ठ भाव मे जाय और षष्ठेश चतुर्थ भाव मे जाय। इसके भी तीन भेद हैं। 1. दो शुभ भावों के स्वामियों का परस्पर परिवर्तन जैसे लग्न व पंचम भाव का परिवर्तन या दो केन्द्रेशों का परिवर्तन या केन्द्र और त्रिकोण भाव मे परस्पर परिवर्तन। 2. दो त्रिकेशांे का परिवर्तन जो विपरीत राजयोग बनाता है। 3. किसी केन्द्रेश या त्रिकोणेश का त्रिकेश से परिवर्तन। जैसे दशमेश का द्वादेश से परिवर्तन या पंचमेश या द्वादेश के बीच परिवर्तन। 2. ग्रह या राशि परिवर्तन  इसका वर्णन स्व. आर. जी. राव द्वारा अनुवादित और

जेल जाने के योग

ज्योतिष शास्त्र अनुसार कुंडली के आठवें मतांतर से बारहवें भाव से कारावास तथा सजा का विचार किया जाता है। कुंडली के इस घर में राहु अगर अष्टमेश के साथ हो तो उसके अशुभ प्रभाव के कारण व्यक्ति को किसी बड़े अपराध के कारण जेल जाना पड़ता है। शनि  मंगल और राहू मुख्य रूप से यह तीन ग्रह एवम् इनका आपसी सम्बन्ध जेल के कारक है। शनि व 12 भाव सजा का कारक है। छठा भाव व मंगल राहू अपराध के कारक है। अगर किसी व्यक्ति की कुण्डली में मंगल और राहु एक साथ किसी भाव में बैठकर युति करते हैं तो जेल योग बनता है केतु रस्सी बेड़ी हथकड़ी का कारक ग्रह हैं अशुभ मंगल व राहु के बीच दृष्टि संबंध बनता हो तो अंगारक योग की वजह से ऐसा इंसान हिंसक स्वभाव वाला हो जाता है और अपराध करता है जिससे जेल जाना पड जाता है। शनि मंगल व राहु मुख्य रूप से जेल यात्रा कराने का भी योग बनाते हैं और इनकी युति या आपस में दृष्टि इस तरह की स्थितियां बना देती है कि आखिर इंसान को जेल जाना ही पड जाता है। जन्मकुंडली में सूर्यादि ग्रह समान संख्या में लग्न एवं द्वादश तृतीय एवं एकादश, चतुर्थ, दशम, षष्ठ एवं अष्टम भाव में स्थित हो तो यह बंधन योग बनाता है यह स्थिति