तांगेवाला और वो रात

बात अगस्त 1926 की है लखनऊ के कलैक्टर रिचर्ड विलियम वर्ड को सीतापुर के जिलाधीश एच.एम. ईलियट ने विशेष लेटर भेज कर काकोरी केस के फरार मुजरिमो की पहचान के लिये उनके फोटो और अंय जानकारयिां मांगी ईलियट के अनुसार उन्हें एस.पी. सीतापुर ने सूचित किया है कि शहर के मशहूर सेठ दौलतराम के यहाँ कुछ अजनबी युवक ठहरे हुये है। पुलिस को शक है कि ये काकोरी डकैती के मुजरिम है। लेकिन एक तो सेठ काफी रसूख वाला है। दूसरे इन युवकों के खिलाफ कोई सबूत नही है। स्थानीय पुलिस के पास काकोरी कांड के मुजरिमों की कोई पहचान की कोई पुख्ता जानकारी नही है लाट साहब ने पत्र की एक काॅपी तुरंत एस.पी. लखनऊ जोसफ हार्डविक को भेजी और जरूरी कागजात और फोटोज तुरंत सीतापुर भिजवाने का आदेश दिया कप्तान साहिब ने अपने सबसे खास और खुफिया मुकहमे के तेज तर्रार अफसर इन्सपैक्टर ले वेस्टन यानि मुझे इस काम की जिम्मेदारी सौंपी मैने अगले दिन रेकार्ड रूम से जरूरी कागज हासिल किये और मुहकमे की मोटर से शाम को निकल पड़ा मेेरे साथ ड्राईवर अनवर अली और एक कान्सटेबल मोहन सिंह था अगस्त का महीना था निकलते निकलते सूरज डूब चुका था शाही पुल पार करते की शहर समाप्त हो चुका था दूर-दूर तक खेत बाग नजर आ रहे थे कुछ दूर चलने पर ही तेज बारिस होने लगी रात गहरा गई थी जब हम सिधौेली पहुँचे ही थे एक नई मुसीबत गले पड़ गई गाड़ी अचानक घरघरा की बंद हो गई जो ड्राईवर की लाख कोशिश करने पर भी स्टार्ट नही हुयी पानी अभी बरस रहा था दूर-दूर तक सन्नाटा पसरा हुआ था दूर-दूर तक केवल तेज हवा और पानी का तेज शोर फैला हुआ था मोटर मे बैठे-बैठे करीब एक घंटा बीत गया तभी पीछे से एक तांगा आता नजर आया वीरान रास्ते पर बारिस के खराब मौसम मे खड़ी मोटर देखकर तांगे वाले ने तांगा रोका और ड्राईवर से पूछा क्या हुआ भाई कुछ नही मोटर खराब हो गई है। कोई मदद मिलेगी क्या नही भइया इस समय तो नही मिलेगी सुबह जरूर कोई इंतजाम हो पायेगा मोटर मे रात बिताने का तो कोई मतलब नही है। यहां से कुछ ही दूर पर मेरा गांव है। अगर आप लोगों को कोई एतराज ना हो तो आज रात आप मेरे घर पर रात बिताईये वहां आप लोगों को कोई तकलीफ नही होगी हम सब लोग तांगे पर बैठ गये तांगे वाले ने बताया कि उसका नाम कृपाशंकर है और वो भीटी गांव का रहने वाला है। सड़क पर करीब तीन-चार मील चलने पर बांयी ओर एक रास्ता जाता नजर आया तांगा मुड़ा रास्ता कच्चा और संकरा था दोनो ओर घनी झाड़ियो और पेड़ो से घिरा था बारिस अभी भी जारी थी माहौल बड़ा डरावना था तांगेवाले ने बताया कि भीटी पहुँचने के लिये सवा मील और चलना पड़ेगा पौन घंटे चलने पर गांव नजर आने लगा रास्ता गांव मे ही आकर समाप्त हो जाता था गांव मे करीब तीस-पैंतीस घर थे तांगा एक मकान के सामने जाकर रूका तांगा वाले का मकान गांव के किनारे ही था हम सब उतर गये मकान कुछ कच्चा कुछ भाग पक्का था तांगे वाले ने बताया कि सामने वाला खेत और उससे लगा बाग उसका ही है। मेरा एक मकान खेत पर है। वहाँ पर सब सुविधा है आप लोगों को कोई दिक्कत नही होगी आप लोग वही रात बिताईये गांव से 200 गज की दूरी पर खेत बाग की सीमा पर वो मकान था हम सब मकान पहुँचे तांगवाले ने कमरे मे डिबरी जलाई हमने देखा यहाँ तीन बड़े और हवादार पक्के कमरे था जिनमे कई तख्त पड़े थे घड़ों मे पानी रखा था हम सब एक ही कमरे मे रूक गये हम कपड़े उतार कर सोने चले गये अभी हमे सोये दो घ्ंाटे बीते होंगंे एक भारी आवाज को सुन कर मेरी नींद टूट गई दरअसल हुआ यह था कि हवा के जोरदार झोंके से खिड़की भड़ाक से खुल गई गई थी सब उठ गये कमरे मे अंधेरा फैला था ढिबरी गिर कर बुझ चुकी थी मैं ढिबरी ढंूढने लेगा मेरे हाथ कुछ लगा पर ढिबरी नही मिली मै खिड़की बंद करने गया तो देखा कि बाहर तूफानी हवा के साथ मूसलाधार बारिस हो रही थी हवा के तेज झोंकेां के साथ पानी की बौछारे कमरे के भीतर आ रही थी मै खिड़की बंद करने जा ही रहा था कि तभी मैने देखा के करीब 30-25 फुट दूर दो आदमी खड़े थे जिन्होने उपर से नीचे तक पूरे सफेद कपड़े पहने थे मानो पोस्टमार्टम को जाने वाली दो लाशे खड़ी कर दी हो इस भयानक नजारे को देखकर मेरी हालत पतली हो गई मुख सूख गया सर चकराने लगा मैने अनवर को आवाज दी सब खिड़की के पास आ गये मैने उन्हें खिड़की के बाहर खड़ी आकृतियों को दिखाते हुये पूछा यह क्या है। उन्हे देखकर अनवर सहित मोहन सिंह की भी रूह फना हो गर्द मोहन सिंह कांपती हुयी फँसी-फँसी आवाज मे बोला साहब मुझे तो यह भूत प्रेतों का चक्कर लगता है। अनवर कलमा पढने लगा तभी भारी गर्जना के साथ बिजली कड़की बारिस और तेज हो गई इतनी तेज की सामने की हर चीज दिखना बंद हो गई मैने खिड़की बंद की हमारी नींद गायब हो चुकी थी और हम अंधेरे मे आपस मे ईधर-उधर की बातें करने लगे तभी हमारे कानो मे किसी औरत की दर्द भरी आवाज सुनाई दी। बचाओं मार डालेगा मुझे हाय मार डाला कोई तो बचाओं मुझे लगा कि बाहर किसी औरत की जान खतरे मे है। मैने तुरंत पिस्तौल निकाली और खिडकी खोलकर बाहर देखा तो पाया बारिस थम चुकी थी हल्की बूँदे गिर रही थी खिड़की के सामने करीब दस गज दूर एक 20-22 साल की जवान औरत जिसने लाल साड़ी और ब्लाउज पहन रखा था सामने खेेत मे बेतहाशा चीखती हुयी भाग रही थी उसके पीछे एक काला-कलूटा पहलवान टाइप का आदमी जिसके हाथ मे बांका था उसके पीछे भाग रहा था तभी उस आदमी ने बांका चलाया जो लड़की के कंधे पर पड़ा औरत के मुँह से दर्द भरी चीख निकली और खून का फव्वारा फूट पड़ा मैने आव ना देखा ताव और उस हत्यारे को निशाना बना कर दो फायर झोंक दिये निशाना अचूक था कातिल भी चीखता हुया ढेर हो गया मै मोहन और अनवर के साथ दरवाजा खोलकर मौका-ए-वारदात पर पहुँचा वहाँ पहुँच की मेरी आँखे दहशत और हैरत से फटी रह गई वहाँ दूर-दूर तक ना तो कोई घायल अनवर चिलाया साहब ये तो भूत हैँ। और वहीँ बेहोश हो गया मुझे भी जोर का चक्कर आया फिर मुझे कुछ याद नही रहा जब औरत थी ना कातिल की लाश दूर-दूर तक केवल खामोश खेत और कहीं कहंी बाग दिख रहे थे मुझे होश आया तो मुझे लगा जैसे मैने दुनिया का आठवां आश्चर्य देख लिया है। हम सब सरकारी मोटर मे थे और अनवर और मोहन मेरे बगल मे ही सो रहे थे मैने मोहन को जगाया वो हड़बडा कर उठा और हैरत से चारों ओर देखकर बोला साहब हम यहांँ कैसे आये हम तो उस गांव मे थे मै भी हैरान था जो घटा था केवल सपना तो हरगिज नही हो सकता था पर एक सच्चाई सामने भी थी जिसको नकारा नही जा सकता था तभी वहां से लोकल पुलिस का गश्ती दल निकला वो पुलिस की सरकारी मोटर को इस तरह खड़ा देखकर अनवर से बातचीत करने लगा सारी बात जान कर उसने हमे सिधौली पुलिस स्टेशन मे पहुँचाया पुलिस मैकेनिक ने हमे जानकारी दी कि मोटर गैराज मे भेज दी गई है उसे ठीक होने मे चार पाँच घन्टे लग जायगंे दरोगा सत्यनारायन ने हमारे भोजन, आवास की व्यवस्था की हमारी आप बीती जानकर उसके भी आश्चर्य की सीमा नही रही दरोगा की बात सुनकर मुझे लगा कि मै पागल हो जाऊँगा जब उसने बताया साहब सड़क के बांयी ओर 40-50 मील तक कोई गांव ही नही है। वो जमीन जंगल महकमे की है। आपकी बताई जगह पर एक कच्चा रास्ता जरूर है। पर वो कुछ दूर पर बने विभाग के गोदाम पर समाप्त हो जाता है। मै और मेरा स्टाफ अपनी बात पर अड़ा था शाम को हम सब कल रात वाली जगह पहुँचे तो पाया कि वास्तव मे वहां कोई रास्ता नही है। एक पतली सी पगडंडी जरूर थी जो करीब दो सौ गज दूर वन विभाग के गोदाम पर जाकर समाप्त हो जाती थी आबादी का तो सवाल ही नही उठता था दरोगा को लगा कि मेरा दिमाग खराब हो चुका है। तभी मैने दरोगा को बताया कल रात मैने दो फायर भी किये थे लो मेरा देखो मेरा रिवाल्वर मैने रिवाल्वर निकाला तो लगा मै फिर से पागल हो गया हँू रिवाल्वर पूरा भरा था एक भी कारतूस उसमे कम नही था खैर अगले दिन हम सीतापुर पहुँचे और कप्तान साहब को सारे कागज सौंपे और फोन पर लखनऊ एस.पी. साहब को रिर्पोट की तो एस.पी. साहब ने मुझे हुक्म दिया कि मै सीतापुर मे ही रहूँ और यदि वास्तव मे काकोरी केस का मुजरिम मिलता है। तो उसे अपनी निगरानी मे लखनऊ लेकर आऊँ। अगले दिन पुलिस ने शहर के सब मुखबिरों को बुला कर फोटो दिखाकर मुजरिमों केे बारे मे सूचना मांगी मुखबिरों ने बताया कि सेठ दौलतराम के यहाँ ठहरे युवकों मे से किसी का चेहरा वगैरहा इन क्रान्तिकारियों से दूर-दूर तक नही मिलता है। यह उनसे बिलकुल अलग है सेठ एकदम बेदाग है। पर मिश्रिख के रोशनलाल नामक मुखबिर ने एक तस्वीर पहचानते हुये कहा इस हुलिया से मिलते-जुलते एक आदमी को कुछ दिन पहले मैने बँजवा गांव के बाजार मे नून-तेल खरीदते हुये देखा है। और ज्यादा पूछने पर उसने बताया कि जहाँ तक उसे याद है। मैने उसे गांव के उत्तर मे बाग के पार जाते देखा था सीतापुर के कप्तान साहब ने मेरी मुसाहिबी मे क्रान्तिकारियो को पकड़ने के लिये एक विशेष दस्ता तैयार किया हम बजवा गांव गये यह मिश्रिख नीमसार मार्ग पर दांयी ओर करीब एक मील अंदर बसा 60-70 मकानों का छोटा सा गांव था जिसके पूरब मे गांव से सटा एक बड़ा सा मैदान था जहाँ सप्ताह मे दो बार बुध और शनिवार को स्थानीय हाॅट लगती थी आस पास 10-12 गांव के लोग अपनी जरूरत का समान इसी हाट से लेते थे इस मैदान के पूर्व मे उत्तर से दक्षिण को एक चैड़ा कच्चा रास्ता था जो मिश्रिख मार्ग से उत्तर के दूरस्थ गावों को जाता था हमने गांव के साहूकार सोहनलाल सुनार के निचले तल को अपना ठिकाना बनाया ओर अपनी पहचान छुपाते हुये सादे कपड़ों मे हम हाट पर नजर रखने लगे बुधवार के दिन तो हमे कोई सफलता नही मिली पर शनिवार की दोपहर बाद जब हम खाना खाकर आराम कर रहे थे तभी रोशनलाल हड़बड़ाता सा आया और कहने लगा जल्दी चलिये हुजूर आपका मुजरिम बाजार मे सौदा ले रहा है। हम लोग सादे कपड़ों मे बाजार मे पहुँचे मुखबिर ने एक सांवले रंग के हटटे-कटटे युवक के पीछे खड़े होकर अपने सर पर बंधा अंगोछा उतार कर गले मे लपेट लिया यह हमारे लिये गुप्त ईशारा था कि यही शिकार है। हम लोग उसके आस-पास फैल गये उसने तीन-चार अलग-अलग दु़कानों से सामान खरीदा और बाजार से बाहर जाने लगा हम उसे पकड़ने के लिये लपके ही थे तभी अचानक एक अजीब सी घटना घट गई ना जाने कैसे दो साँड़ भंयकर तरीके से लड़ने लगे एक साँड ने पीछे हटते हुये कई दुकानो के तंबू कनात तोड़कर समान बिखरा दिया लोग जान बचा कर ईधर-उधर भागने लगे बड़ी भगदड़ मच गई जब तक भगदड़ शांत हुयी तो हमारा शिकार हाथ से निकल चुका था अगली शाम रोशनलाल एक दुबले-पतले युवक को लेकर आया रोशनलाल ने कहा हुजूर यह हीरालाल है। गांव के उत्तर मे इसके आम के बाग है। इसने बाग मे कुछ अजीब सी बात देखी थी जिसे डरकर इसने किसी को नही बताया हुजुर शायद यह बात आपके काम की हो मेरे कहने पर हीरालाल बोला साहब गांव से कुछ दूर पर हमारे आम के बाग हँै। पिछले महीने आम के मौसम मे रात मे बाग की रखवाली करता था बाग मे मैने एक मढैया डाल रखी है। रात मै वहीँ चारपाई पर सो जाता हूँ अक्सर रात मे मेरी नींद खुल जाती थी तो मैं देखता था कि अक्सर देर रात को गांव से सटे रास्ते से एक तांगा उत्तर की दिशा को चला जाता था उसमे लालटेन जलती थी कभी उसमे सवारियां होती थी कभी तांगा खाली होता था तांगा कभी जल्दी तो कभी दो-दो तीन-तीन घंटों बाद लौटता था हमने कई दिन तक बाजार मे युवक की तलाश मे गाढा लगाया पर हमे कुछ हाथ ना लगा शायद उसे हमारे ईरादों की जानकारी हो गई थी अब हमने सारा ध्यान तांगेवाले पर लगाया हम रोज रात मे बाग वाले रास्ते के दोनो ओर फैल कर रात 9 बजे से सुबह होने तक गाढा लगाते थे चार रातों तक तो हमे कोई कामयाबी नही मिली पर पांचवी रात करीब 11 बजे हमे रास्ते के दाहिनी ओर से एक तांगा आता नजर आया जिसमे लगी लैम्पबत्ती और टापों की आवाज हमे दूर से ही सुनाई दे रही थी कि चेहरा पूरी तरह से ढक गया था मैने तांगा जाने दिया और तांगा बगल से निकला उसमे कोई सवारी नही थी तांगे वाला कोई अधेड़ उमर का आदमी था जिसने अपना सिर व चेहरा अंगोछे से इस तरह लपेट रखा था एक सिपाही को उसके पीछे दौैैैैैैैैैैैैैैैैड़ा दिया आधे घंटे बाद सिपाही ने लौटकर बताया कि तंागा यहाँ से आधे मील दूर बने खंडहरनुमा मकान पर रूका तांगे वाला खंडहर के एक सही सलामत कमरे के भीतर चला गया कमरे मे लालटेन की रोशनी थी अंदर कुछ लोग बातचीत कर रहे थे दो घंटे बाद तांगा वापस आता नजर आया मैने गार्डस को पूरी तरह एलर्ट कर दिया तांगा करीब आया हमने देखा इस बार उसमे चार लोग और बैठे थे हमने अपनी पोजीशन ली और सीटी बजाकर तांगा रोकने का ईशारा किया आवाज भी लगाई हमे देखकर तांगेवाले ने तांगा दौड़ा दिया तभी सड़क पार खड़े मोहन सिंह ने फुर्ती से घोडे पर छलांग लगा दी और वो लगाम पकड कर लटक गया घोड़ा हड़बडा गया और तांगा उपर नीचे बुरी तरह हिचकौले लेने लगा तभी तांगे से किसी ने मोहन सिंह पर फायर किया किस्मत से मोहन सिंह बच गया हम भी पोजीशन लिये थे दोनो ओर से क्रास फायरिंग होने लगी बदमाश तांगा छोड़कर दूसरी ओर भागे उन्हें नही पता था कि सड़क पार भी गार्डस तैनात है। अब बदमाश दोनो सब ओर से घिर चुके थे हमने उन्हें कई बार सेरेन्डर करने को कहा पर वो लगातार गोली चलाते रहे थोड़ी देर की मुठभेड़ के बाद उनकी ओर से फायरिंग बंद हो गई हमने टार्च की रोशनी मे देेखा तांगेवाले सहित सारे बदमाश मारे गये थे दो सिपाही भी घायल हुये थे तंागेवाला का चेहरा देखकर मेरी रूह फना हो गई तांग वाला हूबहू वही था जिसने उस बरसाती रात मे अपने मकान मे शरण दी थी उसके दांयी कलाई पर नाम वही भी गुदा था जों उस रात के तांगे वाले का था कृपाशंकर पर यह कैसे संभव था और वो कौन था मै डर और घबराहट से बेहोश हो गया होश मे आने के बाद मै कई दिनों तक बिलकुल खामोश नीम पागल सा रहा बाद मे बदमाशों की पहचान हरदोई पुलिस ने की हरदोई पुलिस के अनुसार वो क्रान्तिकारी नही सण्डीला के ईनामी डाकू थे जो वारदात करके यहाँ आकर छुप जाते थे यह क्या रहस्य था जिस मै आज तक नही समझ सका जिसकी याद आते ही मेरी रूह आज भी कंाप जाती है कई तांत्रिकों मुल्ला पादरी विद्वानों से मिलने पर भी मुझे मेरे सवालो के जवाब आज तक नही मिले पर उस भयानक रात की एक निशानी अभी भी मेरे पास मौजूद हैं जो रात मुझे ढिबरी ढूँढते हुयी मिली थी वो था ढिबरी का ढक्क्न जिसे मैने पाॅकेट मे डाल लिया था।
यह रहस्य-रोमांच कहानी कालपनिक है