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माता लक्ष्मी को प्रसन्न करने का सर्वोत्तम समय है दीपावली का पर्व

माता लक्ष्मी प्रकृति की एक महान शक्ति है। दीपावली का पर्व प्रकृति के मानवों को प्रदान करने की प्रक्रिया का प्रतीक है। जगत का स्वामी सूर्य भगवान विष्णु है और पृथ्वी माता लक्ष्मी है। तुला राशि में जब सूर्य नीच के होते है और चन्द्र भी तुला में होता है। ऐसी महा अमावस्या की रात भगवान सूर्य अपनी पोषणकारी उर्जा को पृथ्वी पर भेजते है। माता लक्ष्मी अर्थात् पृथ्वी उन वरदानों को प्राप्त कर पृथ्वी के समस्त प्राणियों को वितरित करती है। संसार के सभी धन, धान्य, पशु, पक्षी, रत्न, द्रव्य पदार्थ पृथ्वी के अंग हैं। मानव को सभी संासारिक भोग पृथ्वी से ही प्राप्त होते है। दीपावली का पर्व माता लक्ष्मी ‘पृथ्वी’ को प्रसन्न करके तमाम सांसारिक सम्पदाओं को प्राप्त करने का अमोद्य अवसर और मूर्हत है। जो कि प्रत्येक वर्ष सभी को एक अवसर देता है।  
 दीपावली का पर्व माता लक्ष्मी को प्रसन्न करने का सर्वोत्तम समय है। पौराणिक कथानुसार इस दिन माता लक्ष्मी समुद्र मंथन के समय क्षीर सागर से प्रकट हुयी थी। सभी देवताओं और मनुष्यों ने उनकी उपासना की प्राचीन भारतीय साहित्य में कुछ ऐसे पदार्थो का वर्णन है, जिनकी दीपावली की रात पूजा करने से जातक को माता लक्ष्मी की कृपा तथा आर्शीवाद प्राप्त होता है।
काली हल्दीः- यह एक अदरक से मिलती जुलती जड़ होती है। जिसे दीपावाली की रात लक्ष्मी पूजन के समय लाल वस्त्र पर स्थापित करके उस पर फूल, मिठाई से पूजा करने से आय में वृद्धि होती है।
अशोक के पत्तेः- दीपावली के दिन 7 अशोक के पत्ते लेकर उन पर कुमकुम से श्रीं लिखे व पूजन के बाद तिजोरी मे रखने से लाभ प्राप्त होता है।
कौड़ीः- 7 सफेद कौड़ियाँ लेकर दीपावली पूजन के बाद एक देशी घी का दीपक जलाकर घी में सातों कौड़ियाँ डाल दे व द्वितीया को कौड़ियाँ निकाल कर गल्ले या तिजोरी में रख दे।
चाँदी का सिक्काः- चाँदी का सिक्का पान के पत्ते पर दही लगाकर पूजा के सामने रखे सिक्के की भी पूजा करें। तत्पश्चात यह सिक्का अपनी तिजोरी में रखे।
कमल गट्टाः- यह काले बीज होते है, 5 या 7 कमल गट्टे लेकर माता को चढ़ाये व द्वितीया के कमल गट्टे कपड़े मे तिजोरी मे स्थापित करें।
दक्षिणवर्ती शंखः- यह माता लक्ष्मी की कृपा पाने का अमोध उपाय है। दीपावली की रात माता लक्ष्मी को चढ़ाकर इसका भी विधिवत पूजन करें। तत्पश्चात् घर में इसे लाल कपड़े में लपेटकर घर में रखें।
गुल्लक पूजनः- यह कुबेर जी का प्रतीक होता है। लक्ष्मी पूजन के पश्चात् इसका भी पुष्प, चंदन, जल, अक्षत, मिष्ठान से पूजन करे व एक रूपया इसमे डाले फिर रोज इसमे कुछ रकम डालते रहे। भर जाये तो दूसरी गुल्लक का पूजन करके उसे स्थापित करे। प्रत्येक दीपावली को नई गुल्लक लें।
एकाक्षी नारियलः- यह ताड़वृक्ष का फल होता है। इसे दीपावली रात पूजन के साथ इसकी पूजन करें। तत्यपश्चात घर के कैश बाक्स में रखने से धनागम बढ़ता है।
मोमती चक्रः- सात गोमती चक्र लेकर उन्हें गंगाजल से स्नान कर कर उन्हें दही लगाकर एक पान के  पत्ते पर रखे, उनका मंत्रोपचार पूजन करने के पश्चात तिजोरी में रखने से धन की प्राप्ति होती है। 
श्री फलः- यह बड़ी सुपाड़ी के आकार का सफेद फल होता है। दीपावली की रात माता लक्ष्मी को एक जोड़ा श्री फल चढ़ाये फिर द्वितीया को उसे लाल कपड़े में लपेट कर तिजोरी में रखने से आय में वृद्धि होती है।
उल्लू की प्रतिमा या मूर्तिः- उल्लू माता लक्ष्मी का वाहन है। उल्लू की मूर्ति या फोटो को दीपावली की रात पूजा करने से माता लक्ष्मी प्रसन्न होती है। लक्ष्मी अक्सर उल्लू को मिल जाती है।
हाथी व कमलः- कमल व हाथी गजलक्ष्मी व  शुभ-लक्ष्मी के प्रतीक है। इनकी पूजा होने से माता लक्ष्मी प्रसन्न होती है। माता लक्ष्मी का एक नाम कमला भी है।
शुभ कलशः- मिट्टी या ताम्बे का कलश लेकर उसमें जल, गंगाजल व पंचरत्न डालकर उसे दीपावली की रात स्थापित करें। और नित्य उसका पानी बदले, यह जल लक्ष्मी का प्रतीक है। माता लक्ष्मी चलायमान हैं और धन भी सदा चलता रहता है।   
चरणः- माता लक्ष्मी के चरणों का जोड़े, स्टीकर, कागज या ताम्बे में लेकर या दही से पैर के चिन्ह बनाकर उसको दीपावली को रात धूप, दीपक रोली, फूल, मिठाई से पूजन करके कुछ दक्षिणा चढ़ायें। लक्ष्मी दीपक तंत्रः- दीपावली की रात से प्रारम्भ करके नित्य माता लक्ष्मी के चित्र के सामने गाय के धी मे गुलाब का इत्र मिलाकर चैमुखी दीपक जलावे माता से धन देने याचना  करे, नित्य ऐसा दीपक जलाकर धन मांगें।


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