विजयादशमी का पर्व और तांत्रिक महत्व

शारदीय नवरात्रि की समाप्ति पर दशमी तिथि को विजयादशमी का पर्व पड़ता है। आम भाषा मे इसे दशहरा कहते हैं। इस तिथि का अपना ज्योतिषीय, धार्मिक व तांत्रिक महत्व है। यह तंत्र-मंत्र बाधा नाश, शत्रु विनाश, दरिद्रता नाशक, मुकदमा विजय तथा अन्य प्रकार की तंत्र क्रियाओं के लिये श्रेष्ठ मुहूर्त है। यह तंत्रशास्त्र मे यह भाग्य जगाने का सर्वोत्तम समय माना जाता है। पौराणिक कथा के अनुसार भगवान विष्णु के आठवें अवतार प्रभु श्री राम ने शारदीय नवरात्रि में नौ दिन तक माँ दुर्गा की नित्य 108 कमल पुष्पों से साधना की और उनसे प्राप्त वरदान और शक्ति की मदद से विश्व के सबसे शक्तिशाली राक्षस लंकापति रावण का वध करके उसके अत्याचारों से पीड़ित मानवता की और तीनों लोकों की रक्षा की थी। विद्वान ऋषियों व पूर्वजों ने दशहरा पर्व पर जीवन की अनेक समस्याओं को हल करने हेतु विशेष साधनाओं को जन्म दिया था। कुछ सरल और ज्योतिषीय उपाय निम्नलिखित हैं।
1. यदि घर मे किसी प्रकार का जादू टोना किया गया हो तो दशहरे की रात में सात काली कौड़ी काले धागे मे बांधकर दरवाजे की चैखट में लटका दें। तो जादू टोना किया खत्म हो जायेगा।
2. व्यापार वृद्धि हेतु दशहरा की रात कपूर और रोली को जला कर इसकी राख बना लें। और इस राख को चाँदी की डिब्बी में भर कर एकादशी को गल्ले में रखें।
3. दशहरे के दिन किसी मंदिर मे लगे पीपल के वृक्ष में सफेद ध्वजा लगाने से व्यापार की बाधा दूर हो। 
4. यदि जातक तंत्र प्रहार से ग्रसित हो तो दशहरे की रात काले तिल या काले चावल की काले वस्त्र चार की छोटी छोटी पोटलियां बनायें और फिर राम रक्षा का पाठ करके इन्हें घर के चारों कोने में गाढ़ दें। 
5. यदि आप कर्जे से ग्रस्त हों तो दशहरे की रात आध पाव काली राई हाथ मे लेकर घर के तीन चक्कर लगायें फिर घर से निकल कर ‘ऊँ हलीं क्लीं महालक्षभ्यों नमः’ का 21 बार पाठ करके इन्हें किसी तिराहे पर तीनों मे राई फेंक कर बिना पीछे देखें वापस आयें और हाथ-पैर धोकर घर में प्रवेश करे।
6. कर्ज मुक्ति के लिये अष्ठमी की रात किसी एकान्त मे जाकर एक गढ्ढा खोदकर तीन कौड़ियां और तीन गोमती चक्र दबा दें। फिर मट्टी में लाल व हरा गुलाल मिलाकर गढ्ढा भर दें उसके उपर पीला गुलाल से कर्जदार का नाम लिख दें, फिर दशहरे की रात पान के पत्ते पर तीन बताशे, घी में डूबी दो लौगंे, तीन बड़ी इलायची, थोड़ा सा गुड़ और काले तिल किसी वीरान चैराहे पर रख कर सेन्दूर छिड़क कर पान के पत्ते से ढक दें।
7. धन लाभ हेतु दशहरे की रात किसी देवी मंदिर में दो अलग-अलग जगह पर आध पाव रोली, आध पाव सेंन्दूर, सवा मीटर लाल कपड़ा, जटा नारियल, 21 रूपया रख कर पूजन करे। फिर दो ढेरों में से एक स्थान की सामग्री मंदिर में चढा दें। दूसरे स्थान की सामग्री लाल कपड़े मे बंाध कर घर मे रख दें। फिर 21 दिन तक इसे धूप-दीप दिखायें।
8. मनोकामनार्पूिर्त के लिये दशहरे की रात नये सूती वस्त्र में एक जटा नारियल की पूजा करके बांध दें। और रात में बिना बोले इसे चैराहे पर रख आयें।
9. यदि आपका पैसे कही डूबा हों और मांगने पर नही मिल रहा हो तो दशहरे की रात एक गोमती चक्र लेकर दुर्गा जी का नाम लेकर जायें और फिर गढ्ढा खोद कर गोमती चक्र गाढ दें उस पर कर्जदार का नाम लेते हुये सेंदूर छिडकें और एक नीबू काट कर बिना बोेले वापस चले आयें।
10. यदि आपका प्रमोशन नही हो रहा है। तो दशहरे की रात जितने वर्ष आपकी नौकरी या व्यवसाय के बीत गये हो उतने गोमती चक्र लेकर किसी शिवलिंग पर चढा दें और बिना बोलें वापस आ जायें।
11. यदि बेरोजगारी की समस्या हो तो दशहरे के दिन आपने हाथ से अशोक के आठ-आठ पत्ते के दो गुच्छे बनायें और उसक अपने मुख्य दरवाजे के दोनों ओर बांध दे और दीवाली तक रोज शाम को धूप-दीप दिखा कर माँ दुर्गा से रोजगार देने की प्रार्थना करें।