सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

गायन ही मेरा जीवन है: चांदनी वेगड़

देश में विभिन्न तरह की युवा प्रतिभाएँ है, जिन्होंने पूरे भारत में अपनी अलग पहचान बनाई है, ऐसी ही एक है, गुजरात के जामनगर की रहने वाली मधुर आवाज की धनी चांदनी वेगड़ है। एक शो के दौरान उनकी आवाज सुनकर हाई-स्पीड सिने इंटरनेशनल बैनर तले एक हिंदी फीचर फिल्म लिविंग रिलेशन के लिए साइन किया गया है। जिसके निर्माता आाशीष गजेरा व सोनल गजेरा है और निर्देशक अरमान जाहिदी है। चांदनी जामनगर के रहने वाले के.पी. वेगड़ की बेटी है, जोकि गुजरात ज्यूडिशियरी में पूर्व सीनियर सिविल जज एंड चीफ जुडिसियल मजिस्ट्रेट रह चुके है। जामनगर के श्री सत्य साई विद्यालय में दसवीं कक्षा में पढ़ने वाली चांदनी पूरे गुजरात राज्य के राज्य कला महाकुम्भ- 2018, क्राइस्ट कॉलेज, राजकोट के स्पंदन 2019 जैसे कई प्रतियोगिताओं के लिए उनको चुना गया ज्यादातर में प्रथम और कुछ में तृतीय स्थान प्राप्त किया। इसके अलावा गुजरात राज्य में और मुंबई में कई शो में भी हिस्सा ले चुकी है। जब सात साल की थी तब से गायन ही उनके जीवन का सबसे बड़ा लक्ष्य रहा है। चांदनी वेगड़ कहती है के, उनके परिवाल वाले उनको बहुत सपोर्ट करते है। उनके परिवार में उनका बड़ा भाई राज वेगड़, पिता कांतिलाल वेगड़ और उनकी माता अस्मिता वेगड़ है।फिल्म में गाने का मौका मिलने के बारे में गायिका चांदनी वेगड़ कहती है, दिलीपभाई मेरे पिता के मित्र है और उन्होंने मुझे एक गायन प्रतियोगिता में सुना था, उन्ही की वजह से मुझे यह फिल्म मिली है, इसकी रेकार्डिंग जल्द ही मुंबई में होगी। और एक दो प्रोडक्शन हाउस से और बात चल रही है, जल्द ही उसके बारे में भी बताउंगी।
पढाई और गायन दोनों जारी रखेगी या गायन में ही कैरियर बनाएंगी इसके बारे में वे कहती है, मैं दोनों ही जारी रक्खूंगी। जीवन में दोनों ही जरुरी है। गायन ही मेरा जीवन है लेकिन पढाई भी उसके साथ बहुत जरुरी है।
अपने मन पसंद गायक और गायिका के बारे में चांदनी कहती है, लता मंगेशकर व आशा भोसले के गाने को बहुत पसंद करती हूँ। और गायक में अरमान मलिक और अरिजीत सिंह सबसे ज्यादा पसंद है। इन लोगो में जो बात है व बहुत अलग है। वैसे मैं लगभग हर गायक और गायिका के गाने सुनती हूँ।
अब देखना है कि चांदनी वेगड़ बॉलीवुड में कहाँ तक कामयाब होती है?


 


इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

पक्षी आपका भाग्य बदले

मनुष्य का जीवन अपने आसपास के वातावरण से ही प्रभावित होता है। व्यक्ति के आस-पास के पशु पक्षी उसके जीवन का अभिन्न अंग है। भारतीय ऋर्षियों तथा संसार के अध्यात्मवादियो ने संसार के पक्षियों को ना केवल ज्योतिष तथा मनुष्य के भाग्य से जोड़ा है। बल्कि पक्षियों को उपयोग शकुन ज्योतिष, फलित तथा प्रष्न ज्योतिष तथा अनेकों ज्योतिष, तांत्रिक उपचारों और शारीरिक मानसिक रोगों के निवारण में किया है। भारत मे पंच प़क्षी शास्त्र, कल्ली पुराण पर आधारित तोते द्वारा भविष्यवाणी, पक्षी तंत्र तथा शकुन ज्योतिष का प्रयोग आदिकाल से ही किया जाता है भारत मे गरूड़ जी, नीलकंठ, काकभुषुंडी,, हंस, जटायु व संपाती, शुकदेव जी आदि दिव्य पक्षियों तथा अनेक देवी देवताआंे वाहन के रूप मे पक्षियों को प्रयोग किये जाने का  वर्णन है। जैसे भगवान विष्णु का गरूड़, कार्तकेय जी का मयूर, माता लक्षमी का उल्लू, विश्वकर्मा, वरूण जी तथा स्वरसती जी का हंस आदि शनिदेव का कौआ आदि का प्राचीन काल मे पक्षियों द्वारा डाक सेवा युद्ध संबधी शकुन का भी काम लिया जाता था पक्षियों को स्वतंत्रता, नवीन विचारों, आनंद, तनाव, मुक्ति, प्रषंसा, यष, धन्यवाद देने, प्रजनन श

परिवर्तन योग से करें भविष्यवाणी

भारतीय ज्योतिशशास्त्र में भविष्यकथन के सैकड़ों सूत्रो का वर्णन है। इन्ही सूत्रों मे से एक है परिवर्तन योग जिसका वर्णन पाराशरीय और नाड़ी ग्रन्थों दोंनों मे पाया जाता है। हाँलाकि दोनो प्रकार के ग्रन्थों में इन सूत्रों को विभिन्न तरीको से प्रयोग किया गया है ज्योतिष मे परिवर्तन योग के तीन रूप पाये जाते हैं। 1. भाव परिवर्तन 2. राशि परिवर्तन 3. नक्षत्र परिवर्तन  भाव परिवर्तन पाराशरीय व कुछ नाड़ी ग्रन्थों जैसे षुक्र नाड़ी मे इसके सूत्रो का वर्णन पाया जाता है। जो भावा के स्वामियो के बीच स्थान परिवर्तन से बनता है। जैसे चतुर्थेश षष्ठ भाव मे जाय और षष्ठेश चतुर्थ भाव मे जाय। इसके भी तीन भेद हैं। 1. दो शुभ भावों के स्वामियों का परस्पर परिवर्तन जैसे लग्न व पंचम भाव का परिवर्तन या दो केन्द्रेशों का परिवर्तन या केन्द्र और त्रिकोण भाव मे परस्पर परिवर्तन। 2. दो त्रिकेशांे का परिवर्तन जो विपरीत राजयोग बनाता है। 3. किसी केन्द्रेश या त्रिकोणेश का त्रिकेश से परिवर्तन। जैसे दशमेश का द्वादेश से परिवर्तन या पंचमेश या द्वादेश के बीच परिवर्तन। 2. ग्रह या राशि परिवर्तन  इसका वर्णन स्व. आर. जी. राव द्वारा अनुवादित और

जेल जाने के योग

ज्योतिष शास्त्र अनुसार कुंडली के आठवें मतांतर से बारहवें भाव से कारावास तथा सजा का विचार किया जाता है। कुंडली के इस घर में राहु अगर अष्टमेश के साथ हो तो उसके अशुभ प्रभाव के कारण व्यक्ति को किसी बड़े अपराध के कारण जेल जाना पड़ता है। शनि  मंगल और राहू मुख्य रूप से यह तीन ग्रह एवम् इनका आपसी सम्बन्ध जेल के कारक है। शनि व 12 भाव सजा का कारक है। छठा भाव व मंगल राहू अपराध के कारक है। अगर किसी व्यक्ति की कुण्डली में मंगल और राहु एक साथ किसी भाव में बैठकर युति करते हैं तो जेल योग बनता है केतु रस्सी बेड़ी हथकड़ी का कारक ग्रह हैं अशुभ मंगल व राहु के बीच दृष्टि संबंध बनता हो तो अंगारक योग की वजह से ऐसा इंसान हिंसक स्वभाव वाला हो जाता है और अपराध करता है जिससे जेल जाना पड जाता है। शनि मंगल व राहु मुख्य रूप से जेल यात्रा कराने का भी योग बनाते हैं और इनकी युति या आपस में दृष्टि इस तरह की स्थितियां बना देती है कि आखिर इंसान को जेल जाना ही पड जाता है। जन्मकुंडली में सूर्यादि ग्रह समान संख्या में लग्न एवं द्वादश तृतीय एवं एकादश, चतुर्थ, दशम, षष्ठ एवं अष्टम भाव में स्थित हो तो यह बंधन योग बनाता है यह स्थिति