सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

ग्राम विकास की योजनाएं एवं मोबाइल फ्रेण्डली विषयक प्रशिक्षण का आयोजन सम्पन्न

मुख्य विकास अधिकारी अभिषेक गोयल के निर्देशानुसार क्षेत्रीय ग्राम्य विकास संस्थान, रायबरेली में ग्राम विकास की योजनाएं एवं मोबाइल फ्रेण्डली विषयक ग्राम विकास अधिकारियों एवं ग्राम पंचायत सफाई कर्मियों को 3 दिवसीय अनावासीय प्रशिक्षण का आयोजित किया गया।
प्रशिक्षण में संस्थान की उपनिदेशकध्आचार्य गरिमा सिंह ने कहा कि सरकारी योजनाओं में पारदर्शिता लाने हेतु डिजिटल भुगतान करना आवश्यक है। जिसके लिए सभी प्रतिभागियों को मोबाइल, इन्टरनेट का ज्ञान आवश्यक है जिससे समय-समय पर अपने क्षेत्र की प्रगति रिपोर्ट भेजने का कार्य सीखकर अपनी क्षमतावर्धन का विकास कर सके। प्रशिक्षण सत्र में जिला स्वास्थ्य शिक्षा अधिकारी डी0एस0 अस्थाना ने कोविड-19 से सुरक्षा एवं बचाव की जानकारी दी, कम्प्यूटर विषेषज्ञ आलोक कुमार सिंह ने प्रतिभागियों को सरकारी योजनाओं में इन्टरनेट के महत्व को बताते हुये ईमेल आईडी बनाना एवं मेसेज के माध्यम से रिपोर्ट एवं फोटो डाउनलोड करने की सम्पूर्ण जानकारी प्रदान की राष्ट्रीय सूचना केन्द्र के सहायक सूचना अधिकारी बृजेष तिवारी ने जियो टैगिग एवं मैपिंग एवं लोकेशन टेªस करने की जानकारी इन्टरनेट के माध्यम द्वारा दी गई। इसके अतिरिक्त सेवा निवृत्त वरिष्ठ प्रशिक्षण जे0एन0 लाल श्रीवास्तव ने ग्राम्य विकास में संचालित सरकारी योजनाओं एवं सतत् विकास लक्ष्य को प्रोजेक्टर के माध्यम से 17 लक्ष्य के बारे में जानकारी दी। एपीओ पवन कुमार सिंह ने मनरेगा में इन्टरनेट पर कैसे कार्य करना है इससे संबंधित सम्पूर्ण जानकारी दी।
इस अवसर पर सहायक सत्र प्रभारी संजीव कुमार श्रीवास्तव द्वारा अवगत कराया गया कि कोविड-19 से बचाव हेतु सभी प्रतिभागियों को प्रशिक्षण किट के साथ मास्क, सैनेटाइजर आदि उपलब्ध कराया गया जिससे संक्रामक बीमारी कोरोना से बचे रहें साथ ही सभी प्रतिभागियों को प्रतिदिन भोजन, चाय, नाश्ता एवं नियत यात्रा भत्ता प्रतिदिन रूपये 100 के अुनसार सभी प्रतिभागियों को संस्थान में डिजिटल भुगतान किया जायेगा। सत्र समापन पर उपनिदेशक/आचार्य गरिमा सिंह एवं सत्र प्रभारी एस0के0 बाजपेयी द्वारा प्रमाणपत्र वितरण किया गया इस अवसर पर संस्थान के सभी संकाय सदस्य उपस्थित रहें।


 


इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

पक्षी आपका भाग्य बदले

मनुष्य का जीवन अपने आसपास के वातावरण से ही प्रभावित होता है। व्यक्ति के आस-पास के पशु पक्षी उसके जीवन का अभिन्न अंग है। भारतीय ऋर्षियों तथा संसार के अध्यात्मवादियो ने संसार के पक्षियों को ना केवल ज्योतिष तथा मनुष्य के भाग्य से जोड़ा है। बल्कि पक्षियों को उपयोग शकुन ज्योतिष, फलित तथा प्रष्न ज्योतिष तथा अनेकों ज्योतिष, तांत्रिक उपचारों और शारीरिक मानसिक रोगों के निवारण में किया है। भारत मे पंच प़क्षी शास्त्र, कल्ली पुराण पर आधारित तोते द्वारा भविष्यवाणी, पक्षी तंत्र तथा शकुन ज्योतिष का प्रयोग आदिकाल से ही किया जाता है भारत मे गरूड़ जी, नीलकंठ, काकभुषुंडी,, हंस, जटायु व संपाती, शुकदेव जी आदि दिव्य पक्षियों तथा अनेक देवी देवताआंे वाहन के रूप मे पक्षियों को प्रयोग किये जाने का  वर्णन है। जैसे भगवान विष्णु का गरूड़, कार्तकेय जी का मयूर, माता लक्षमी का उल्लू, विश्वकर्मा, वरूण जी तथा स्वरसती जी का हंस आदि शनिदेव का कौआ आदि का प्राचीन काल मे पक्षियों द्वारा डाक सेवा युद्ध संबधी शकुन का भी काम लिया जाता था पक्षियों को स्वतंत्रता, नवीन विचारों, आनंद, तनाव, मुक्ति, प्रषंसा, यष, धन्यवाद देने, प्रजनन श

परिवर्तन योग से करें भविष्यवाणी

भारतीय ज्योतिशशास्त्र में भविष्यकथन के सैकड़ों सूत्रो का वर्णन है। इन्ही सूत्रों मे से एक है परिवर्तन योग जिसका वर्णन पाराशरीय और नाड़ी ग्रन्थों दोंनों मे पाया जाता है। हाँलाकि दोनो प्रकार के ग्रन्थों में इन सूत्रों को विभिन्न तरीको से प्रयोग किया गया है ज्योतिष मे परिवर्तन योग के तीन रूप पाये जाते हैं। 1. भाव परिवर्तन 2. राशि परिवर्तन 3. नक्षत्र परिवर्तन  भाव परिवर्तन पाराशरीय व कुछ नाड़ी ग्रन्थों जैसे षुक्र नाड़ी मे इसके सूत्रो का वर्णन पाया जाता है। जो भावा के स्वामियो के बीच स्थान परिवर्तन से बनता है। जैसे चतुर्थेश षष्ठ भाव मे जाय और षष्ठेश चतुर्थ भाव मे जाय। इसके भी तीन भेद हैं। 1. दो शुभ भावों के स्वामियों का परस्पर परिवर्तन जैसे लग्न व पंचम भाव का परिवर्तन या दो केन्द्रेशों का परिवर्तन या केन्द्र और त्रिकोण भाव मे परस्पर परिवर्तन। 2. दो त्रिकेशांे का परिवर्तन जो विपरीत राजयोग बनाता है। 3. किसी केन्द्रेश या त्रिकोणेश का त्रिकेश से परिवर्तन। जैसे दशमेश का द्वादेश से परिवर्तन या पंचमेश या द्वादेश के बीच परिवर्तन। 2. ग्रह या राशि परिवर्तन  इसका वर्णन स्व. आर. जी. राव द्वारा अनुवादित और

जेल जाने के योग

ज्योतिष शास्त्र अनुसार कुंडली के आठवें मतांतर से बारहवें भाव से कारावास तथा सजा का विचार किया जाता है। कुंडली के इस घर में राहु अगर अष्टमेश के साथ हो तो उसके अशुभ प्रभाव के कारण व्यक्ति को किसी बड़े अपराध के कारण जेल जाना पड़ता है। शनि  मंगल और राहू मुख्य रूप से यह तीन ग्रह एवम् इनका आपसी सम्बन्ध जेल के कारक है। शनि व 12 भाव सजा का कारक है। छठा भाव व मंगल राहू अपराध के कारक है। अगर किसी व्यक्ति की कुण्डली में मंगल और राहु एक साथ किसी भाव में बैठकर युति करते हैं तो जेल योग बनता है केतु रस्सी बेड़ी हथकड़ी का कारक ग्रह हैं अशुभ मंगल व राहु के बीच दृष्टि संबंध बनता हो तो अंगारक योग की वजह से ऐसा इंसान हिंसक स्वभाव वाला हो जाता है और अपराध करता है जिससे जेल जाना पड जाता है। शनि मंगल व राहु मुख्य रूप से जेल यात्रा कराने का भी योग बनाते हैं और इनकी युति या आपस में दृष्टि इस तरह की स्थितियां बना देती है कि आखिर इंसान को जेल जाना ही पड जाता है। जन्मकुंडली में सूर्यादि ग्रह समान संख्या में लग्न एवं द्वादश तृतीय एवं एकादश, चतुर्थ, दशम, षष्ठ एवं अष्टम भाव में स्थित हो तो यह बंधन योग बनाता है यह स्थिति