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महादेवी जी मनुष्य के जीवन को ही एक कवित मानती थीं: न्यायमूर्ति अशोक कुमार

आज का दिन इसलिए बेहद खास हो जाता है कि सोशल मीडिया के दौर में भी प्रयागराज में महादेवी वर्मा को याद किया जा रहा है, उनकी रचना बात हो रही है और आज की कवयित्रियों को ‘महादेवी वर्मा सम्मान’ प्रदान किया जा रहा है। ‘गुफ्तगू’ का यह कार्यक्रम बेहद खास और एक तरह से कालजयी हो गया है। यह बात इलाहाबाद हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति अशोक कुमार ने गुफ्तगू की ओर से आयोजित सम्मान समारोह में कही। न्यायमूर्ति अशोक कुमार ने कहा कि महादेवी जी मनुष्य के जीवन को ही एक कवित मानती थीं, उनका कहना था कि जिस तरह मनुष्य का जीवन चक्र की तरह घूमता रहता है और घूमते हुए नए-नए अविष्कार करता रहता है, ठीक उसी तरह


कविता का निर्माण होता है। गुफ्तगू के अध्यक्ष इम्तियाज अहमद गाजी ने कहा कि टीम गुफ्तगू ने प्रत्येक वर्ष प्रयागराज के एक बड़े कवि का स्मृति दिवस मनाने का संकल्प लिया है, इस वर्ष महादेवी वर्मा का स्मृति समारोह मनाया जा रहा है, अगले वर्ष अकबर इलाहाबादी के निधन के सौ साल पूरा होने पर आयोजन किया जाएगा।
कोविड-19 के जूझते हुए आज का कवि लेखन में जुटा हुआ है, उनकी रचनाओं को एकत्र करके पुस्तकें तैयार की गई हैं, जिनका विमोचन किया गया। वरिष्ठ
पत्रकार मुनेश्वर मिश्र ने कहा कि आज के माहौल में लगातार 17 वर्षों तक गुफ्तगू का संचालन करते रहना अपने आप एक बहुत बड़ा काम है। इसके अध्यक्ष इम्तियाज अहमद गाजी  एक टीम बनाकर यह कार्य कर रहे हैं, उनका यह कार्य बेहद साहसिक और उल्लेखनीय है। प्रयागराज में इनके काम का अलग से आंकलन किया जाएगा।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे प्रो. सुरेश चंद्र द्विवेदी ने कहा कि जब पूरी दुनिया आधी रात में गहरी नींद में होती है, उस समय कवि लेखन कर रहा होता है, समाज और देश की चिंता करता है। इसकी भलाई की चिंता करता है, ऐसे लेखनी को गुफ्तगू ने सहेजने और कवियों को प्रोत्साहित करने का काम किया है, यह बेहद खास काम है। डाॅ. नीलिमा मिश्रा और नरेश कुमार महरानी ने भी विचार व्यक्त किए। इस मौके पर ‘प्रयाग की सात कवयित्रियां’, ‘उत्तर प्रदेश की सात कवयित्रियां’, ‘दिल्ली की सात कवयित्रियां’, ‘देश की सात कवयित्रियां’, ‘सपनों का सम्मान’ और ‘बागेश्वरी’ नामक पुस्तकों का विमोचन किया गया। संचालन मनमोहन सिंह तन्हा ने किया। ‘शान-ए-इलाहाबाद सम्मान’ और ‘महादेवी वर्मा सम्मान’ प्रदान किया गया। दूसरे दौर में कवियों ने अपनी रचनाएं प्रस्तुत की।
‘शान-ए-इलाहाबाद सम्मान’
डाॅ. जगदीश गुलाटी, प्रो. अली अहमद फातमी, विजय अरोरा, डाॅ. सरोज सिंह, रविनंदन सिंह, जूही जायसवाल, ब्रजेश चंद्र मिश्र, सरदार इंद्रपाल सिंह और राहुल चावला
महादेवी वर्मा सम्मान
करुणा झा (नेपाल), ममता वाजपेयी (होशंगाबाद), डाॅ. रेणु अग्रवाल (हैदराबाद), प्रीति शर्मा (सोलन, हिमाचल प्रदेश), ममता कालड़ा (मोहाली), अंजुमन मंसूरी (छिंदवाड़ा), मणि बेन द्विवेदी (वाराणसी), डाॅ. भारती वर्मा (देहरादून), सीमा गर्ग मंजरी (मेरठ), अतिया नूर (प्रयागराज), डाॅ. मंजरी पाण्डेय (वाराणसी), डाॅ. नीलम रावत (लखनऊ), डाॅ. नसीमा निशा (वाराणसी), ममता देवी (कानपुर), शबीहा खातून (बस्ती), शगुफ्ता रहमान (उधमसिंह नगर), रामचंद्र राजा (बस्ती), दिल्ली की सोनिया सूर्य प्रभा, डाॅ. सरला सिंह ‘स्निग्धा’, रिंकल शर्मा, डाॅ. फौजिया नसीम शाद, रीता सिवानी, प्रभा दीपक शर्मा, रोली शुक्ला, प्रयागराज की नीना मोहन श्रीवास्तव, रमोला रूथ लाल ‘आरजू’, रचना सक्सेना, जया मोहन, उषा लाला, अर्चना जायसवाल, ममता सिंह, अना इलाहाबादी, ललिता नारायणी पाठक और मधु गौतम ‘मधु’।


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