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नई विश्व व्यवस्था

सिटी मोन्टेसरी स्कूल, लखनऊ के तत्वावधान में आॅनलाइन आयोजित ‘विश्व के मुख्य न्यायाधीशों के 21वें अन्तर्राष्ट्रीय सम्मेलन’ के प्रतिभागी 63 देशों के राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, न्यायविद्, कानूनविद् व अन्य प्रख्यात हस्तियों  ने ‘लखनऊ घोषणा पत्र’ के माध्यम से संकल्प व्यक्त किया है कि वे विश्व एकता, विश्व शान्ति एवं भावी पीढ़ी के सुरक्षित भविष्य हेतु ‘नई विश्व व्यवस्था’ के गठन हेतु सतत् प्रयास करते रहेंगे। विदित हो कि लगातार चार दिनों तक सम्पन्न हुए इस महासम्मेलन के अन्तर्गत विश्व की प्रख्यात हस्तियों, न्यायविद्ों व कानूनविद्ों की गहन परिचर्चा के निष्कर्ष स्वरूप ‘लखनऊ घोषणा पत्र’ जारी किया गया। न्यायविदों ने संकल्प व्यक्त किया कि वे अपने देश में अपनी सरकार के सहयोग से इस मुहिम को आगे बढायेंगे जिससे विश्व के सभी नागरिकों को नई विश्व व्यवस्था की सौगात मिल सके और प्रभावशाली विश्व व्यवस्था कायम हो सके। उक्त जानकारी सम्मेलन के संयोजक, प्रख्यात शिक्षाविद् डा. जगदीश गाँधी, संस्थापक, सी.एम.एस., ने दी है।
लखनऊ घोषणा पत्र के विस्तृत विवरण में मुख्य न्यायाधीशों, न्यायाधीशों व कानूनविद्ों ने कहा है कि -
हालाँकि संयुक्त राष्ट्र संघ एक बड़ी संस्था है, जो कई अन्य संस्थाओं के साथ लोगों में शान्ति, सामाजिक उत्थान एवं अन्य क्षेत्रों में कार्य कर रही है, किन्तु इसमें ठोस कार्य करने की क्षमता व अधिकारिता की कमी है जिससे आम सभा के निर्णयों को लागू किया जा सके।
हालाँकि कोविड-19 जैसी गंभीर वैश्विक महामारी ने एक ऐसा डर का माहौल बना दिया है जिसमें विश्व भर के कई लोगों की मृत्यु हो गई है और कोविड के कारण लगाये गये लाॅकडाउन के कारण विश्व भर में बिगड़ी अर्थव्यवस्था और अत्यन्त बेरोजगारी और गरीबी का माहौल बन गया है।
हालाँकि ग्लोबल वार्मिंग व पर्यावरण में बदलाव इस ग्रह पर विपरीत असर डाल रहे हैं और इनसे कई तटीय शहरों व द्वीपों के जलमग्न हो जाने का खतरा है, जिससे जैविक विविधता, जंगलों, विभिन्न प्रजातियों व समुद्री जीवन को खतरा बना हुआ है, जिससे मानव स्वास्थ्य पर भी विपरीत प्रभाव पड़ सकता है।
हालांकि क्षेत्रीय व राष्ट्रीय स्तर पर आतंकवाद, सैद्धान्तिक, वैचारिक, राजनैतिक व अन्य मुद्दों पर युद्ध जैसे हालात पैदा कर रहा है जिससे बच्चों व अपने वाली पीढ़ियों सहित, सभी के कल्याण व शान्ति की स्थापना में बाधा उत्पन्न होती है।
अतः हम विश्व के मुख्य न्यायाधीश व न्यायाधीश, जो 6 से 9 नवम्बर 2020 तक सिटी मोन्टेसरी स्कूल, लखनऊ, भारत के विश्व एकता शिक्षा विभाग द्वारा आयोजित, भारतीय संविधान के अनुच्छेद 51 पर आधारित, ‘विश्व के मुख्य न्यायाधीशों के 21वें आॅनलाइन अन्तर्राष्ट्रीय सम्मेलन’ में प्रतिभाग कर रहे हैं, आज पिछले सम्मेलनों में पारित संकल्पों पर दोबारा अपनी मुहर लगाते हुए तथा विश्व में कानून व न्यायिक प्रणाली के केन्द्रीयकरण की वास्तविकता को मानते हुए, संकल्प लेते हैं:-
1. कि संयुक्त राष्ट्र संघ से दृढतापूर्वक अनुरोध किया जाये - 
 क. कि संयुक्त राष्ट्र संघ के चार्टर की समीक्षा तथा सुरक्षा परिषद में संशोधन की प्रक्रिया तेज की जाये,
 ख. कि सामूहिक नरसंहार के हथियारों को खत्म करने के प्रयासों में तेजी लाई जाये,
 ग. कि आतंकवाद, उग्रवाद एवं युद्धों की रोकथाम के लिए प्रयास किये जायें, तथा
 घ. एक अन्तर्राष्ट्रीय पर्यावरण कोर्ट की स्थापना की प्रभावकारिता पर विचार करे।
2. कि विश्व के तमाम देशों के प्रमुखों व राष्ट्राध्यक्षों से अपील की जाए -
 क. कि संयुक्त राष्ट्र चार्टर के निर्देशों के अनुरूप उसे लोकतान्त्रिक बनाने के उद्देश्य से उसका पुनरावलोकन किया जाए।
 ख. कि राष्ट्राध्यक्षों व सरकारी तंत्रों के प्रमुखों की एक उच्च स्तरीय बैठक बुलाकर विभिन्न वैश्विक समस्याओं पर विचार किया जाए और एक लोकतांत्रिक रूप से गठित विश्व संसद के लिए कार्य किया जाए जो एक प्रभावशाली अन्तर्राष्ट्रीय कानून की स्थापना करे।
 ग. कि ग्लोबल वार्मिंग को रोकने/कम करने हेतु तत्काल कदल उठाये जायें जैसा कि अन्तर्राष्ट्रीय सम्मेलनों में आपसी समझौता हुआ है, एवं
 घ. कि महिलाओं की प्रगति सुनिश्चित करने हेतु सभी संभव उपाय किये जाएं ताकि उन्हें पुरूषों के समान मानवाधिकार एवं मौलिक स्वतन्त्रता की गारंटी हो।
3. विश्व के न्यायालयों के सदस्यों से दृढतापूर्वक अनुरोध किया जाय -
 क. कि व्यक्ति के सम्मान को बढावा दिया जाय जो कि सभी मूलभूत मानवाधिकारों तथा मौलिक स्वतंत्रता का आधार है।
 ख. कि राष्ट्रीय सरकारों को प्रेरित किया जाय कि वे अपने समस्त स्कूलों में नागरिक शिक्षा, शान्ति शिक्षा तथा अन्र्त-साँस्कृतिक समझ की शिक्षा देने की शुरूआत करे।
और यह भी संकल्प लेते हैं कि इस घोषणा पत्र को सभी देशों व सरकारों के प्रमुखों व मुख्य न्यायाधीशों के साथ-साथ संयुक्त राष्ट्र संघ के महासचिव तथा क्षेत्रीय संस्थाओं जैसे अफ्रीकन युनियन, यूरोपियम यूनियन, एसियान आदि के प्रमुखों को उनके विचारार्थ और यथा संभव कार्यान्वयन हेतु भेजा जाए।


 


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