नाक ओर लग्नस्थ गुरू

 -डी एस परिहार 

जातक की नाक व नथुने की बनावट उसकी जमांक मे गुरू की राशि को बताती है कि गुरू जंम के समय किस राशि मे बैठा है। क्योंकि गुरू नाक का कारक ग्रह हैं यदि नथुनों के घुमाव छोटे हों पिन्सर के आंतरिक घुमाव जैसा हो तो गुरू मेष राशि मे हो यदि नथुने हल्के से भारी हो तो गुरू वृष मे ेहोे यदि नथुने क्रीसेंट नव अर्ध चन्द्रकार हो तो गुरू मिथुन मे हो े यदि नथुने अध्रचन्द्राकार हो तो गुरू कर्क मे हो यदि गुरू यदि नथुनों का आकार प्रश्नचिन्ह्र जैसा हो और क्ष्तििज पर पसरा हुआ सा हो तो गुरू सिंह मे हो यदि वही आकृति छोटे आकार की हो तो गुरू कन्या मे हो यदि आकृति डोंगे या बाउल के आकार की हो ता गुरू तृला मे हो े यदि नथुने अण्डाकार हो तो गुरू वृश्चिक मे हो यदि नथुने धनुषाकार हो तो गुरू धनु मे होे यदि नथुनों का आकार त्रिभुजाकार और त्रिभुज के किनारे अनियमित या बेढंगे हो तो गुरू मकर मे हो यदि नथुनो का आकार हँंड़िया या घड़े जैसा हो तो गुरू कुंभ मे हो यदि नथुनों का आकार मछली जैसा हो हो तो गुरू मीन में हो यदि नाक का आकार तोते की चोंच जैसा हो तो गुरू कर्क मे हों यदिगुरू वक्री या किसी अंय ग्रह से युत हो नथनों की बनावट मे उपरोक्त विवरण से भिनन हो जायेगी यदि नथुने भारी गोल व चैड़े हो तो गुरू सिंह मकर या कुंभ मे हो यदि नाक सुदर व बड़ी हो तो गुरू कर्क धनु या मीन मे हो यदि नाक सामांय से लंबी हो पर नथुने अधिक मोटे ना हो तो गुरू मेष, वृष, मिथुन या कन्या मे हो यदि नो अधिक मोटी या चैड़ी हो तो गुरू वक्री या पापग्रह युत हो।