विशेष संवाददाता

वैदिक ज्योतिष एवं प्राच्य विद्या शोध संस्थान अलीगंज, लखनऊ के तत्वाधान मे 136 वीं मासिक सेमिनार का आयोजन वाराह वाणी ज्योतिष पत्रिका के कार्यालय मे सम्पन्न हुआ। सेमिनार का विषय ज्योतिष में गृह कलह के योग था, जिसमे डा. डी.एस. परिहार के अलावा जज श्री लाल बहादुर उपाध्याय, पं. जनार्दन त्रिपाठी, पं. के.के. तिवारी, श्री उदयराज कनौजिया, डा. पी.के. निगम. अनिल कुमार बाजपेई एडवोकेट आचार्य मनोज शर्मा व उनके अनुज, पं. एस.एस. मिश्र तथा पं. आनंद त्रिवेदी आदि ज्योतिषियोें एवं श्रोताओं ने भाग लिया। गोष्ठी मे डी.एस. परिहार, जज श्री लाल बहादुर उपाध्याय, श्री उदयराज कनौजिया, तथा पं. आनंद त्रिवेदी ने अपने विचार रखे। पं. आनंद त्रिवेदी ने बताया कि चतुर्थ भाव पर गृह शांति का है। चतुर्थ भाव पर पाप प्रभाव ग्रह कलह देता है। उन्होंने अपने अनुभव के आधार पर बताया कि गृह कलह होने पर तांत्रिक और मुस्लिम उपाय काफी असर कारक होते है। इस विषय पर उन्होंने अपने कई अनुभव जन्य केसेस का वर्णन किया श्री उदयराज कनौजिया ने बताया कि गृह कलह के लिये चतुर्थ भाव सीधे तौर पर जिम्मेदार है। इसके अलावा कई अन्य भावांे का भी अध्ययन करना चाहिये ग्रह कलह के लिये के.पी. पद्धति मे वर्णित भाव और ग्रह कारको का भी अध्ययन करना चाहिये उन्होने महाकवि कालिदास और उनके राजा मित्र कुमार मंगल की श्लोक पहेली की कथा सुनाई और कुमार मंगल द्वारा श्लोक पहेली हल करने के बदले मे आधा राज्य देने की घोषणा करने और आधे राज्य पाने के लालच मे राजनर्तकी द्वारा महाकवि कालिदास हत्या की कहानी सुनाई की। जज श्री लाल बहादुर उपाध्याय ने बताया चतुर्थ भाव पर गृह कलह का होता है गृह कलह के लिये चतुर्थ भाव, उसमे बैठे ग्रह और चतुर्थ भाव पर दृष्टि डालने वाले ग्रह को भी देखना चाहिये उन्होने ज्योतिष ज्ञान के लिये आवश्यक गुणों का वर्णन किया उन्होंने चन्द्र और बुघ के शत्रु ग्रहों को ग्रह कलह के लिये जिम्मेदार बताया चन्द्रमा का परम शत्रु शनि है तथा बुध का शत्रु ग्रह मंगल है। श्री उपाध्याय ने कई जमंाकों का भी उदाहरण दिया और गृह कलह के कई ग्रह योगों का वर्णन किया डा. परिहार ने बताया कि चतुर्थ भाव  पारिवारिक सुख का है। चतुर्थेश यदि नीच अस्त या वक्री हो या चतुर्थेश यदि षष्ठ भाव मे हो या षष्ठेश चतुर्थ भाव मे तो गृह कलह होगी शुक्र परिवार का कारक ग्रह है। लग्नेश से जिस भाव का स्वामी ग्रह छठे आठवें या 12 वें भाव मे होगा उस भाव के संबधी से जातक के गंभीर मतभेद होंगें जैसे यदि लग्नेश सप्तमेश परस्पर 6, 8 या 12 भाव मे हो तो जातक के पति या पत्नी से झगड़ें हो पंचमेश हो तो पुत्र या पुत्री से तृतीयेश हो तो छोटे भाई या बहन से लाभेश हो तो बड़े भाई-बहन से चतुर्थेश हो तो माता से व नवमेश हो तो पिता से झगड़ें हांेंगें शुक्र मंगल परस्पर 6, 8, या 12 वे हो तो पति पत्नी मे झगड़ें हो बुध व चन्द्र मानसिक शांति के ग्रह है यदि बुध शत्रु ग्रह मंगल से युत हो या चन्द्र शुक्र से युत हो तो ग्रह कलह होंगी, स्त्री जातक में शुक्र चन्द्र का योग सास बहू मे झगड़े देता है।  

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