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वक्री ग्रह के बारे मे ज्योतिष मे अनेक भ्रान्तियां है

 - विशेष संवाददाता 

वैदिक ज्योतिष एव प्राच्य विद्या शोध संस्थान लखनऊ के तत्वाधान में वाराह वाणी त्रैमासिक ज्योतिष पत्रिका के अलीगंज लखनऊ के कार्यालय मे 140 वीं सेमिनार का आयोजन किया गया जिसका विषय ज्योतिष द्वारा रोजगार का ज्ञान था। गोष्ठी मे श्री आनंद एस. त्रिवेदी, श्री उदयराज कनौजिया, डा. डी.एस. परिहार, वरिष्ठ ज्योतिषी श्री प्रकाश शर्मा जज एल.बी. उपाध्याय और उदयराज कनौजिया आदि ने अपने विचार व्यक्त किये। प. अनिल कुमार बाजपेई एडवोकेट ने 7 अगस्त 1993 को प्रात-8.43। लखनऊ मे कन्या लग्न मे जंमी एक जातिका की कुंडली पेश करते हुये उसके कैरियर के बारे मे राय मांगी कन्या का जमांक इस प्रकार है। कंया लग्न लग्न मे मंगल व गुरू वृश्चिक मे राहू, कुंभ मे वक्री शनि मीन मे चन्द्रमा-उ. भाद्रपद 3 पद, वृष मे केतु, मिथुन मे शुक्र कर्क मे सूर्य व बुध। जिस पर श्री आनंद एस त्रिवेदी ने बताया कि इस जातिका के जंमाक मे दशम भाव मे शुक्र है। अभी केतु की दशा चल रही है। दो साल बाद अगस्त 2024 मे जब शुक्र की दशा चलेगी जो तब इसे उत्तम नौकरी मिल जायेगी 84 वर्षीय वरिष्ठ ज्योतिषी श्री एस.पी. शर्मा कई कुंडलियों का उदाहरण देते हुये अपने अनुभव बताये कि वक्री ग्रह के बारे मे ज्योतिष मे अनेक भ्रान्तियां है। वक्री ग्रह अपनी वास्तविक राशि का ही फल देता है। ना कि पिछली राशि का एक अंय सूत्र बताते हुये उन्होने कहा कि अगर कि यदि किसी ग्रह की दो राशियां हो और वो राशियां परस्पर 6/8 या, 2/12 हो तो यदि उस राशि मे गया स्वग्रही ग्रह ग्रह की दूसरी राशि हेतु अशुभ फल देगा जैसे शुक्र की राशियां वृष और तुला और मंगल की राशियां मेष व वृश्विक परस्पर 6/8 होती है। यदि मंगल मेष या वृश्चिक मे हो या शुक्र वृष या तुला मे हो तो मंगल या शुक्र अपने दूसरी राशि के भाव के लिये अशुभ व घातक फल देग यही बात शनि की राशियां मकर व कुंभ पर लागू होती है। शनि की राशियां मकर व कुंभ परस्पर 2/12 है। मकर का शनि शुभ देगा परन्तु कुंभ का शनि मकर राशि वाले भाव हेतु अशुभ फल देगा शर्मा जी ने बताया कि नौकरी हेतु सबसे महत्वपूर्ण भाव छठा है। फिर 10 वां भाव फिर लग्न। और व्यापार 7, 11, 2 और लग्न भाव महत्वपूर्ण होते है। 12 भाव 14 वस्तुयें देता है। जज श्री एल.बी. उपाध्याय वे चर्चा पर बोलते हुये बताया कि वक्री ग्रह सूर्य से केवल 5 वें भाव से 8 वें भाव तक ही वक्री होता है। ना कि नवम भाव मे भी उन्होंने जुड़वा बच्चों की कुंडली के बारे मे बताया कि लोमेश संहिता मे शिवजी ने माता पार्वती को बताया कि जुडवा बच्चों की लग्न व नवंाश के ग्रह एक ही होते है। अतः उनके फलादेशों हेतु दशमेश की स्थिति को देखें। मंगल व शनि जिस ग्रह के साथ बैठते है। उसकी शक्ति छीन लेते है। लग्न से दशमेश नवांश मे जिस राशि मे जाये उस राशि का स्वामी ग्रह जिस राशि मे जाये वो दूसरा ग्रह ही रोजगार का क्षेत्र बतायेगा नाड़ी ज्योतिषी श्री परिहार जी ने बतलाया रोजगार हेतु पाराशरी ज्योतिष मे लग्न से दशमेश वन्द्र से दशमेश और सूर्य से दशमेश की स्थिति को लग्न चक्र व नवांश मे देखने का प्राविधान है। जातिका की कुंडली का विवेचन करते हुये उन्होने बताया शनि जाॅब कारक है कि जातिका का शनि वक्री है। अतः वो मकर का फल देगा अतः जातिका का एक जाॅब लग कर छुट जायेगा मकर के शनि से निकोण मे मंगल गुरू, केतु  और 7 वंे सूर्य व बुध है। मकर का शनि शश योग बना रहा है। उससे त्रिकोण मे गुरू जाॅब प्रतिष्ठापूर्ण होगा शनि गुरू दोनों कानून के कारक ग्रह है। जाॅब कानूनी क्षेत्र मे होगा मकर राशि नौकरी व राज्य सरकार की प्रतीक है। सूर्य व केतु सरकारी नौकरी देते है। प्रसिद्ध नाड़ी ग्रन्थ देवकेरलम के अनुसार जातिका का जाॅब पाॅईन्ट सिंह राशि मे स्थित है। अतः इससे त्रिकोण मे गुरू के गोचर मे ही उसे नौकरी मिलेगी जातिका को सरकारी नौकरी तब लगेगी जब गुरू मेष राशि मे होगा होगा यह योग मई 2023 मे आ रहा है। अतः उसे नौकरी मई 2023 के बाद लगेगी जातिका के जमंाक मे राहू केतु धूरी के एक ओर पुण्य कारक गुरू है। दूसरी ओर कर्म कारक शनि अतः राहू केतु नौकरी व जीवन मे अनेक बाधायें देगें गोष्ठी मे ज्योतिषाचार्य पं. के.के. तिवारी, पं. जनार्दन प्रसाद त्रिपाठी जज श्री एल.बी. उपाध्याय प. आनंद एस. त्रिवेदी, पं. एस.एस. मिश्रा, प शिवशंकर त्रिवेदी, ज्योतिष भूषण श्री उदयराज कनौजिया, श्री एस.पी. शर्मा, प. अनिल कुमार बाजपेई एडवोकेट, और डा. डी.एस. परिहार ने भाग लिया गोष्ठी की अध्यक्षता श्री परिहार ने की गोष्ठी के अंत मे डा परिहार मे सबको धन्यवाद दिया। 

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