बद्री प्रसाद ने नौ वर्ष की उम्र में थामा था तिरंगा - डा0 मनोज पाण्डेय


 प्रकाश चेतना समिति के तत्वाधान में अमर शहीद पं0 चन्द्रशेखर आजाद पार्क परिसर में स्वतन्त्रता संग्राम सेनानी बद्री प्रसाद यादव 25वीं पुण्य तिथि एकता दिवस के रूप में मनायी गयी।  इस अवसर पर विधान मण्डल दल के मुख्य सचेतक/विधायक डा0 मनोज कुमार पाण्डेय ने कहा कि बद्री प्रसाद यादव का जन्म 5 जनवरी 1912 को ऊँचाहार विधान सभा के उण्डवा ग्राम में हुआ था, उन्होनें 9 वर्ष की उम्र में तिरंगा थामा था। 6 जनवरी 1921 को उण्डवा ग्राम के क्रांतिकारी लोग किसान आन्दोलन में शामिल न हो सके, इस कारण ग्रामवासियों पर अंग्रेजो के चाटुकार सरदार निहाल सिंह की फसल नष्ट करने व जिल्ला फूंकने का झूठा मुकदमा दर्ज करके लोगों को जेल भेजा था, जिसमें 9 वर्षीय बद1ी प्रसाद यादव, उनकी माँ इंदिरा यादव व पिता सद्धू प्रसाद यादव सहित महिलाएँ एवं बच्चों सहित 123 लोग शामिल थे। सेन्ट्रल बार एसोसिएशन के अध्यक्ष कमलेश चन्द्र पाण्डेय ने कहा कि बद्री प्रसाद यादव की पत्नी श्रीमती उमराई यादव ने 12 वर्ष की आयु में वानर सेना में शामिल होकर जेल गयी थी।  इनका दाम्पत्य जीवन क्रान्तिकारी के रूप में बीता।  वरिष्ठ समाजसेवी डा0 अमिताभ पाण्डेय ‘रिंकू’ ने कहा कि बद्री प्रसाद यादव के परिवार के चार लोग स्वतन्त्रता संग्राम सेनानी होने के बावजूद कभी कोई सरकारी सहायता नहीं प्राप्त की।  बच्चों को भी किसी प्रकार का लाभ लेने से रोक दिया था।  शिक्षाविद् डा0 शशिकान्त शर्मा ने कहा कि बद्री प्रसाद यादव की बड़ी पुत्री राजकुमारी यादव गृहणी हैं, बड़े पुत्र रामनरेश यादव जू.हा. के प्रधानाध्यापक के पद से सेवानिवृत्त हो चुके हैं।  दूसरे पुत्र राम बहादुर यादव आईटीआई से सेवानिवृत्त हो चुके हैं सबसे छोटे पुत्र ओपी यादव विधि व्यवसाय कर रहे हैं। स्वर्णकार विचार मंच के मण्डल अध्यक्ष भौमेश स्वर्णकार ने कहा कि बद्री प्रसाद यादव 1942 के अंग्रेजों भारत छोड़ो आन्दोलन में शामिल होकर अंतिम जेल यात्रा की।  अमित श्रीवास्तव एडवोकेट ने कहा कि देश को आजाद होने के बाद जब उ0प्र0 में पीएसी का गठन हुआ तो बद्री प्रसाद यादव पीएसी में भर्ती हुए थे और 1973 में सेवानिवृत्त हुए थे और 31 अक्टूबर 1997 को उन्होनें अन्तिम सांस ली।  कार्यक्रम की अध्यक्षता व्यापार मण्डल के प्रदेश संगठन मन्त्री मुकेश रस्तोगी व संचालन प्रकाश चेतन समिति के महामन्त्री चौधरी सुरेश निर्मल ने किया।  इस अवसर पर पूर्व मन्त्री/विधायक डा0 मनोज कुमार पाण्डेय ने उपस्थित गणमान्य नागरिकों को अंगवस्त्र व लौह पुरूष सरदार बल्लभ भाई पटेल का चित्र प्रतीक चिन्ह के रूप में वितरित किया।  

इस अवसर पर मुख्य रूप से बसन्त सिंह बग्गा, महेन्द्र तिवारी, अशोक मिश्रा एडवोकेट, सुरेश चन्द्र यादव एडवोकेट, आलोक विक्रम सिंह, अंकित यादव, संदीप यादव, चौधरी आनन्द निर्मल, पवन यादव, अमित गौरव, अजय आकाश, अनुज यादव बरवारी, आरपी सिंह एडवोकेट, शत्रुघ्न पटेल, चौधरी सुरेश पटेल, अजय आनन्द पाल, डीएन पाल, उमानाथ पाल, अनिल यादव, डा. जीतू यादव, मनोज गौतम, अतुल यादव एडवोकेट आदि लोगों ने बद्री प्रसाद यादव के चित्र पर पुष्प अर्पित कर उनके व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर प्रकाश डाला।प्रकाश चेतना समिति के तत्वाधान में अमर शहीद पं0 चन्द्रशेखर आजाद पार्क परिसर में स्वतन्त्रता संग्राम सेनानी बद्री प्रसाद यादव 25वीं पुण्य तिथि एकता दिवस के रूप में मनायी गयी।  इस अवसर पर विधान मण्डल दल के मुख्य सचेतक/विधायक डा0 मनोज कुमार पाण्डेय ने कहा कि बद्री प्रसाद यादव का जन्म 5 जनवरी 1912 को ऊँचाहार विधान सभा के उण्डवा ग्राम में हुआ था, उन्होनें 9 वर्ष की उम्र में तिरंगा थामा था। 6 जनवरी 1921 को उण्डवा ग्राम के क्रांतिकारी लोग किसान आन्दोलन में शामिल न हो सके, इस कारण ग्रामवासियों पर अंग्रेजो के चाटुकार सरदार निहाल सिंह की फसल नष्ट करने व जिल्ला फूंकने का झूठा मुकदमा दर्ज करके लोगों को जेल भेजा था, जिसमें 9 वर्षीय बद1ी प्रसाद यादव, उनकी माँ इंदिरा यादव व पिता सद्धू प्रसाद यादव सहित महिलाएँ एवं बच्चों सहित 123 लोग शामिल थे। सेन्ट्रल बार एसोसिएशन के अध्यक्ष कमलेश चन्द्र पाण्डेय ने कहा कि बद्री प्रसाद यादव की पत्नी श्रीमती उमराई यादव ने 12 वर्ष की आयु में वानर सेना में शामिल होकर जेल गयी थी।  इनका दाम्पत्य जीवन क्रान्तिकारी के रूप में बीता।  वरिष्ठ समाजसेवी डा0 अमिताभ पाण्डेय ‘रिंकू’ ने कहा कि बद्री प्रसाद यादव के परिवार के चार लोग स्वतन्त्रता संग्राम सेनानी होने के बावजूद कभी कोई सरकारी सहायता नहीं प्राप्त की।  बच्चों को भी किसी प्रकार का लाभ लेने से रोक दिया था।  शिक्षाविद् डा0 शशिकान्त शर्मा ने कहा कि बद्री प्रसाद यादव की बड़ी पुत्री राजकुमारी यादव गृहणी हैं, बड़े पुत्र रामनरेश यादव जू.हा. के प्रधानाध्यापक के पद से सेवानिवृत्त हो चुके हैं।  दूसरे पुत्र राम बहादुर यादव आईटीआई से सेवानिवृत्त हो चुके हैं सबसे छोटे पुत्र ओपी यादव विधि व्यवसाय कर रहे हैं। स्वर्णकार विचार मंच के मण्डल अध्यक्ष भौमेश स्वर्णकार ने कहा कि बद्री प्रसाद यादव 1942 के अंग्रेजों भारत छोड़ो आन्दोलन में शामिल होकर अंतिम जेल यात्रा की।  अमित श्रीवास्तव एडवोकेट ने कहा कि देश को आजाद होने के बाद जब उ0प्र0 में पीएसी का गठन हुआ तो बद्री प्रसाद यादव पीएसी में भर्ती हुए थे और 1973 में सेवानिवृत्त हुए थे और 31 अक्टूबर 1997 को उन्होनें अन्तिम सांस ली।  कार्यक्रम की अध्यक्षता व्यापार मण्डल के प्रदेश संगठन मन्त्री मुकेश रस्तोगी व संचालन प्रकाश चेतन समिति के महामन्त्री चौधरी सुरेश निर्मल ने किया।  इस अवसर पर पूर्व मन्त्री/विधायक डा0 मनोज कुमार पाण्डेय ने उपस्थित गणमान्य नागरिकों को अंगवस्त्र व लौह पुरूष सरदार बल्लभ भाई पटेल का चित्र प्रतीक चिन्ह के रूप में वितरित किया।  
इस अवसर पर मुख्य रूप से बसन्त सिंह बग्गा, महेन्द्र तिवारी, अशोक मिश्रा एडवोकेट, सुरेश चन्द्र यादव एडवोकेट, आलोक विक्रम सिंह, अंकित यादव, संदीप यादव, चौधरी आनन्द निर्मल, पवन यादव, अमित गौरव, अजय आकाश, अनुज यादव बरवारी, आरपी सिंह एडवोकेट, शत्रुघ्न पटेल, चौधरी सुरेश पटेल, अजय आनन्द पाल, डीएन पाल, उमानाथ पाल, अनिल यादव, डा. जीतू यादव, मनोज गौतम, अतुल यादव एडवोकेट आदि लोगों ने बद्री प्रसाद यादव के चित्र पर पुष्प अर्पित कर उनके व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर प्रकाश डाला।

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