मेडिकल खरीद में गोलमाल

- संदीप रिछाहरया, सहायक संपादक


- जैम पोर्टल पर सेटिंग की ठेकेदारी

- लगभग डेढ करोड़ रूपये से ज्यादा की होनी है चिकित्सा उपकरणों की खरीद

- डेढ करोड से ज्यादा की खरीद में टीओ के साथ केवल जिला अस्पताल के अधिकारी व कर्मी शामिल

- दवा कंपनी के ठेकेदार ने डीएम को पत्र सौंप सीएमएस से निकाली गई बिड पर लगाये अनियमितता के आरोप

चित्रकूट। केंद्र व राज्य सरकार आम आदमी को अच्छे उपचार देने के लिए लगातार प्रयासरत है। मुख्यमंत्री हर जिले में मेडिकल कालेज के अभियान को आगे बढ़ा रहे हैं। सरकार जीवन रक्षक दवाओं, बीमारियों से बचाने को उपकरणोे की खरीद पर मेडिकल विभाग के अधिकारियों व कर्मचारियों का खेल निरंतर जारी है। इस बात का खुलासा शनिवार को पहुंचे एक शिकायती पत्र से स्पष्ट हुआ।

ईशान मेडिको के पार्टनर मनीष ने बताया कि मुख्य चिकित्साधीक्षक चित्रकूट ने पिछली 18 फरवरी को मेडिकल उपकरणों की खरीद का टेंडर जैम पोर्टल पर निकाला गया था। इस टेंडर के अनुसार लगभग डेढ़ करोड़ रूपये से मेडिकल उपकरणों की खरीद की जानी थी। इस खरीद के लिए सीएमएस की बनाई कमेटी में सीएमएस अध्यक्ष, एसएमओ स्टोर, चीफ फार्मेसिस्ट स्टोर व ट्रेजरी आफीसर को रखा गया। हैरत की बात यह है कि इतनी बड़ी खरीद के लिए

किसी भी राजस्व के अधिकारी को कमेटी में नही रखा गया। इसके लिए कोल्टाइन, ईशान मेडिकोज, लखनउ आप्टीकल, मेसर्स लाइफ केयर सर्जकल, मेसर्स ईलिट केयर, मेसर्स ममेडी प्लस, मेडिकल सर्जिकल इक्यूमेंट एजेंसी, परविट इंडिया, मेसर्स सूजू एसोसिएटस ने टेंडर भरा। टेंडर खुलने की तारीख 10 मार्च थी। टेंडर खुलने के पहले सभी आवदकों 10 मार्च को सुुबह सभी फर्मों को इनवैलिट कर दिया गया। बाद में तीन फर्मों को वैलिड करार देकर उन्हें खरीद के लिए उपयुक्त पाया गया। बाकी की फर्मों को छोटी छोटी गलतियां मसलन 100 रूपये का स्टाम्प पेपर कम है, जैसी बातें कर हटा दिया गया। नियमावली के हिसाब से जैम पोर्टल पर अगर किसी ठेकेदार का कोई पेपर कम होता है तो उसे 48 घंटों के अंदर सम्मिट किया जा सकता है, पर सीएमएस कार्यालय के कुछ लोग इसे स्वीकार नही कर रहे हैं।

शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि पहली बात इतनी बड़ी खरीद में कोई भी डीएम का चुना हुआ राजस्व या विकास विभाग का अधिकारी नही है। दूसरी बात टेंडर खुलने के कुछ समय पहले सभी कंपनियों को इनवैलिट करने के बाद केवल तीन कंपनियों को वैध कैसे मान लिया गया। उन्होंने कहा कि इस खरीद में बड़े घोटाले की संभावना से इंकार नही किया जा सकता। सभी टेंडर डालने वाली फर्मो को बुलाकर खुली निविदा के प्रपत्र उच्चधिकारी द्वारा जांच कराकर सही काम किया जाए।मेडिकल खरीद में ‘गोलमाल‘

- जैम पोर्टल पर सेटिंग की ठेकेदारी

- लगभग डेढ करोड़ रूपये से ज्यादा की होनी है चिकित्सा उपकरणों की खरीद

- डेढ करोड से ज्यादा की खरीद में टीओ के साथ केवल जिला अस्पताल के अधिकारी व कर्मी शामिल

- दवा कंपनी के ठेकेदार ने डीएम को पत्र सौंप सीएमएस से निकाली गई बिड पर लगाये अनियमितता के आरोप

चित्रकूट। केंद्र व राज्य सरकार आम आदमी को अच्छे उपचार देने के लिए लगातार प्रयासरत है। मुख्यमंत्री हर जिले में मेडिकल कालेज के अभियान को आगे बढ़ा रहे हैं। सरकार जीवन रक्षक दवाओं, बीमारियों से बचाने को उपकरणोे की खरीद पर मेडिकल विभाग के अधिकारियों व कर्मचारियों का खेल निरंतर जारी है। इस बात का खुलासा शनिवार को पहुंचे एक शिकायती पत्र से स्पष्ट हुआ।

ईशान मेडिको के पार्टनर मनीष ने बताया कि मुख्य चिकित्साधीक्षक चित्रकूट ने पिछली 18 फरवरी को मेडिकल उपकरणों की खरीद का टेंडर जैम पोर्टल पर निकाला गया था। इस टेंडर के अनुसार लगभग डेढ़ करोड़ रूपये से मेडिकल उपकरणों की खरीद की जानी थी। इस खरीद के लिए सीएमएस की बनाई कमेटी में सीएमएस अध्यक्ष, एसएमओ स्टोर, चीफ फार्मेसिस्ट स्टोर व ट्रेजरी आफीसर को रखा गया। हैरत की बात यह है कि इतनी बड़ी खरीद के लिए

किसी भी राजस्व के अधिकारी को कमेटी में नही रखा गया। इसके लिए कोल्टाइन, ईशान मेडिकोज, लखनउ आप्टीकल, मेसर्स लाइफ केयर सर्जकल, मेसर्स ईलिट केयर, मेसर्स ममेडी प्लस, मेडिकल सर्जिकल इक्यूमेंट एजेंसी, परविट इंडिया, मेसर्स सूजू एसोसिएटस ने टेंडर भरा। टेंडर खुलने की तारीख 10 मार्च थी। टेंडर खुलने के पहले सभी आवदकों 10 मार्च को सुुबह सभी फर्मों को इनवैलिट कर दिया गया। बाद में तीन फर्मों को वैलिड करार देकर उन्हें खरीद के लिए उपयुक्त पाया गया। बाकी की फर्मों को छोटी छोटी गलतियां मसलन 100 रूपये का स्टाम्प पेपर कम है, जैसी बातें कर हटा दिया गया। नियमावली के हिसाब से जैम पोर्टल पर अगर किसी ठेकेदार का कोई पेपर कम होता है तो उसे 48 घंटों के अंदर सम्मिट किया जा सकता है, पर सीएमएस कार्यालय के कुछ लोग इसे स्वीकार नही कर रहे हैं।

शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि पहली बात इतनी बड़ी खरीद में कोई भी डीएम का चुना हुआ राजस्व या विकास विभाग का अधिकारी नही है। दूसरी बात टेंडर खुलने के कुछ समय पहले सभी कंपनियों को इनवैलिट करने के बाद केवल तीन कंपनियों को वैध कैसे मान लिया गया। उन्होंने कहा कि इस खरीद में बड़े घोटाले की संभावना से इंकार नही किया जा सकता। सभी टेंडर डालने वाली फर्मो को बुलाकर खुली निविदा के प्रपत्र उच्चधिकारी द्वारा जांच कराकर सही काम किया जाए।




 

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