मैं गाय हूँ मेरा स्वाभाव लड़ना झगड़ना नहीं है

- मनोज मिश्रा, अयोध्या ब्यूरो चीफ

मैं वही हूं जिसे आप सब कभी गौमाता कहते थे, जी हाँ वही गौमाता जिसे आप सभी पूजा करते थे अब कहां गई वह पूजा कहां गई वह भक्ति? मैं वही गोवंश हूं जिसके दूध को पिला करके अपने बच्चों को अपने बच्चों को स्वस्थ और तंदुरूस्त रखते थे, क्या आप सबको मेरे दूध और मेरे घी का कर्ज याद है? मैं तो मर रही हूं तड़प कर भूख से प्यास से किंतु आप सब से आग्रह है विनती है कि मेरे भी छोटे-छोटे बच्चे है मेरे उन बच्चों को यदि आप मे थोड़ी सी दया थोड़ी सी इंसानियत बची हो तो मेरे उन मासूम बच्चों को बचा लो, जैसे आप के बच्चे आप को प्यारे है उसी तरह मै भी एक माँ हूँ मुझे भी मेरे बच्चे प्यारे है। ईश्वर नें मुझे धरती पर भेजा, तो किन्तु ओ ईश्वर भूल गया की एक दिन ये गौवंश इंसानों पर बोझ बन जाएगी क्यू की आज कलयुग मे इंसान इतना स्वार्थी हो गया है की हमारी क्या औकात हमें तो जानवर कहा जाता है, हम तो जानवर है जब इंसान जन्म देने वाले अपने माता-पिता को घर से निकाल कर वृद्धआश्रम मे भेज देता है मैं गाय हूँ मेरा स्वाभाव लड़ना झगड़ना नहीं है किन्तु कोई दुःख तकलीफ यदि होगी तो मैं किससे कहूं?

मैं गौवंश हूँ मेरा आप सब से एक सवाल है क्या आप मेरे सवाल का जवाब दे सकते है? क्या आप से न्याय की अपेक्षा करूँ पूरी होगी?

तो सुनो और जवाब दो,

एक समय ऐसा भी आता है जब मैं दूध नहीं दे पाती उस समय इंसानों को मैं बोझ लगने लगती हूँ ऐसे मे एक भगवान का भेजा हुआ शख्स आता है और हमारे रहने और खाने के लिए पूरा खर्च वहन करता है हमारे देख-भाल के लिए कुछ लोगों को रोजगार भी दिया जाता है हम यदि बीमार हो तो हमारी जाँच के लिए डा. भी नियुक्त किए जाते है, जब इन सबको इनके मेहनत का मेहनताना मिलता है तो आखिर मेरे चारा मे घोटाला क्यू करते है, क्यू मेरे ऊपर खर्च होने वाले पैसे से अपने घर के फर्नीचर और लोगों को अपना शान दिखाने के लिए गाड़ी खरीदते है क्या उन जिम्मेदार लोगों को एक पल भी ये अहसास नहीं होता की आखिर ये पैसा गौवंश के पेट को काट कर उनके चारा का घोटाला करके आया है आखिर आईने के सामने खड़े होकर ऐसे जिम्मेदार लोग कैसे अपने ही निगाहों से निगाहें मिला लेते है। क्या मेरी दुर्दशा अब किसी संगठन को नहीं दिखाई देतीं?

मैं गौवंश हूँ मेरा चलते-चलते शासन-प्रशासन और उत्तर प्रदेश के मुखिया से एक ही सवाल, क्या मैं इतनी बुरी हूँ क्या मै बहुत खाती हूँ जो आप मेरा खर्चा नहीं उठा सकते यदि हाँ तो रोज-रोज मरने से अच्छा है मुझे एक ही बार मे मार डालो। यदि उत्तर प्रदेश के मुखिया जी हमें बचाना चाहते हो हमें न्याय देना चाहते हो तो जिन लोगों पर हमारी जिम्मेदारी आप नें सौपी है उन लोगों से आप हिंसाब लें हर एक चीज का। इसी सन्दर्भ मे मैं अपने सखी की तस्वीर और वीडियो आप सभी को भेज रही हूँ आप सभी देखें और हो सके तो न्याय करें।

आप को बता दूँ ये तस्वीर और वीडियो अयोध्या जिले के मिल्कीपुर तहसील के अंतर्गत ग्राम रूकुम्भी, विकास खण्ड मिल्कीपुर मे बने गौशाला की है जहाँ पर एक गौवंश इतनी कमजोर है बीमार है की उसे कौवा अपने चोंच से नोच रहे है लेकिन उसका विरोध कर सके इतनी भी शक्ति नहीं है क्या आप नें यहाँ डा. साहब को नियुक्ति नहीं किया है?

क्या प्रदेश के मुखिया जी आप नें यहाँ के गौशाला मे चारा पर्याप्त मात्रा मे हो उसके लिए पैसे नहीं भेजें?

मैं क्या क्या कहूं अब तो पुकारते-पुकारते आवाज भी साथ छोड़ रही है इतना ही कहना है की हो सके तो हमें न्याय दो।



 

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